मुंबापुरी में सहस्रों के समष्टि संकल्प से राष्ट्ररक्षा हेतु प्राप्त हुआ आध्यात्मिक बल !

श्री राजमातंगी महायज्ञ विशेष

यज्ञ में आहुति देते समय मुख्य आचार्य श्री. गुरुमूर्ति शिवाचार्यजी, पीछे बैठे बाईं ओर से शिवागम विद्यानिधिजी आगमाचार्य श्री. अरुणकुमार गुरुमूर्तिजी, शिवश्री एस. राजकुमार शिवम्जी और शिवश्री जी. कार्तिकेय शिवम्जी

वेदपरंपरा के चिरकालीन एवं शाश्वत स्वरूप को दर्शानेवाला तथा देवता, प्रकृति और समाज को जोडनेवाला यज्ञ ! यह केवल कर्मकांड नहीं, अपितु प्राचीन भारतीय विज्ञान पर आधारित आध्यात्मिक स्तर की सनातन परंपरा का यह दैवीय उपहार है !

प्राचीन काल में ऋषि-मुनियों और राजाओं द्वारा अनेक यज्ञ किए जाने के उल्लेख धर्मग्रंथों में मिलते हैं । आज भी कलियुग में यज्ञपरंपरा को अक्षुण्ण रखनेवाले विद्वान पंडित इस भारतभूमि पर उपस्थित हैं, यह हमारा परम सौभाग्य ही है !

यज्ञस्थल पर पुष्पों से निर्मित देवी की विशेष मूर्ति

सनातन संस्था की ओर से तपोभूमि भारत को सुरक्षा-कवच प्राप्त हो तथा भारत की सर्वांगीण उन्नति हो, इस व्यापक उद्देश्य से सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी की प्रेरणा से १७ मई अर्थात अधिक ज्येष्ठ शुक्ल प्रतिपदा को श्री राजमातंगी महायज्ञ प्रभादेवी, मुंबई में संपन्न हुआ !

श्री राजमातंगी महायज्ञ सफलतापूर्वक संपन्न !

श्री राजमातंगी महायज्ञ के समय पूर्णाहुति देते १. वेदमंत्र पढते श्री. गुरुमूर्ती शिवाचार्य २. शिवागम विद्यानिधी मुख्य आचार्य श्री. अरुणकुमार गुरुमूर्ती, तथा अन्य पुरोहित गण तथा इस समय ३. श्रीसत्‌शक्ति (श्रीमती) बिंदा सिंगबाळजी, ४. सद्गुरु नीलेश सिंगबाळजी, ५. श्रीचित्‌शक्ति (श्रीमती) अंजली गाडगीळजी तथा ६. सद्गुरु डॉ. मुकुल गाडगीळजी

इरोड, तमिलनाडु के शिवागम विद्यानिधिजी, आगमाचार्य श्री. अरुणकुमार गुरुमूर्तिजी और यज्ञ के मुख्य आचार्य श्री. गुरुमूर्ति शिवाचार्यजी तथा उनके सहयोगी पुरोहित, साथ ही यज्ञ के मुख्य यजमान के रूप में श्रीसत्शक्ति (श्रीमती) बिंदा सिंगबाळजी, सद्गुरु नीलेश सिंगबाळजी, श्रीचित्शक्ति (श्रीमती) अंजली गाडगीळजी तथा सद्गुरु डॉ. मुकुल गाडगीळजी जैसे उच्च कोटि के संतों का यह दुर्लभ योग मुंबापुरी (मुंबई) में सिद्ध हुआ और श्री राजमातंगी महायज्ञ विधि-विधान से संपन्न हुआ !

यज्ञ के लिए उपस्थित श्रद्धालु

८ सहस्र से अधिक प्रत्यक्ष तथा ४० देशों के ५८ सहस्र से अधिक ऑनलाइन जुडे श्रद्धालुओं ने इस यज्ञ का लाभ लिया ।

महायज्ञ के माध्यम से रामराज्य का संकल्प !

आदर्श राष्ट्र-निर्माण की प्रक्रिया को गति देने के लिए आध्यात्मिक ऊर्जा ही आवश्यक होती है । इस यज्ञ के कारण भारतभूमि के चारों ओर सुरक्षा-कवच निर्माण हुआ है । आज राष्ट्र की सर्वांगीण उन्नति के लिए प्रयास हो रहे हैं, ऐसे समय में श्री राजमातंगी महायज्ञ के माध्यम से हुए समष्टि महासंकल्प से आपातकाल में राष्ट्र की रक्षा एवं परिणामस्वरूप आगामी समय में समृद्धि के लिए आध्यात्मिक बल भी प्राप्त हुआ है ! सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी ने अपने राष्ट्र एवं धर्म कार्य का आरंभ २५ वर्ष पूर्व जिस मुंबापुरी (मुंबई) से किया था, उसी नगरी से एक प्रकार से भावी रामराज्य के संकल्प का श्रीगणेश इस महायज्ञ के संकल्प से हुआ है !