श्री राजमातंगी महायज्ञ विशेष

वेदपरंपरा के चिरकालीन एवं शाश्वत स्वरूप को दर्शानेवाला तथा देवता, प्रकृति और समाज को जोडनेवाला यज्ञ ! यह केवल कर्मकांड नहीं, अपितु प्राचीन भारतीय विज्ञान पर आधारित आध्यात्मिक स्तर की सनातन परंपरा का यह दैवीय उपहार है !
प्राचीन काल में ऋषि-मुनियों और राजाओं द्वारा अनेक यज्ञ किए जाने के उल्लेख धर्मग्रंथों में मिलते हैं । आज भी कलियुग में यज्ञपरंपरा को अक्षुण्ण रखनेवाले विद्वान पंडित इस भारतभूमि पर उपस्थित हैं, यह हमारा परम सौभाग्य ही है !

सनातन संस्था की ओर से तपोभूमि भारत को सुरक्षा-कवच प्राप्त हो तथा भारत की सर्वांगीण उन्नति हो, इस व्यापक उद्देश्य से सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी की प्रेरणा से १७ मई अर्थात अधिक ज्येष्ठ शुक्ल प्रतिपदा को श्री राजमातंगी महायज्ञ प्रभादेवी, मुंबई में संपन्न हुआ !
महायज्ञ के माध्यम से रामराज्य का संकल्प !आदर्श राष्ट्र-निर्माण की प्रक्रिया को गति देने के लिए आध्यात्मिक ऊर्जा ही आवश्यक होती है । इस यज्ञ के कारण भारतभूमि के चारों ओर सुरक्षा-कवच निर्माण हुआ है । आज राष्ट्र की सर्वांगीण उन्नति के लिए प्रयास हो रहे हैं, ऐसे समय में श्री राजमातंगी महायज्ञ के माध्यम से हुए समष्टि महासंकल्प से आपातकाल में राष्ट्र की रक्षा एवं परिणामस्वरूप आगामी समय में समृद्धि के लिए आध्यात्मिक बल भी प्राप्त हुआ है ! सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी ने अपने राष्ट्र एवं धर्म कार्य का आरंभ २५ वर्ष पूर्व जिस मुंबापुरी (मुंबई) से किया था, उसी नगरी से एक प्रकार से भावी रामराज्य के संकल्प का श्रीगणेश इस महायज्ञ के संकल्प से हुआ है ! |



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