यज्ञसंस्कृति को पुनर्जीवित करनेवाले सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी !

एक यज्ञ का संकल्प करते सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी

सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजीे की प्रेरणा से अभी तक १ सहस्र ३०० (१,३००) से अधिक यज्ञ और अनुष्ठान संपन्न किए जा चुके हैं । इनमें से अनेक अनुष्ठान सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी की आध्यात्मिक उत्तराधिकारिणी श्रीसत्शक्ति (श्रीमती) बिंदा नीलेश  सिंगबाळजी तथा श्रीचित्शक्ति (श्रीमती) अंजली मुकुल गाडगीळजी ने स्वयं किए हैं । इन सभी यज्ञों और अनुष्ठानों का संकल्प रामराज्य की स्थापना का था !

श्रीचित्शक्ति (श्रीमती) अंजली मुकुल गाडगीळजी विगत १२ से अधिक वर्षों से संपूर्ण भारत में भ्रमण कर नाडीपट्टिका में किए उल्लेख के अनुसार तीर्थक्षेत्रों में जाकर धार्मिक विधि एवं अनुष्ठान कर रही हैं । समष्टि (समाज) के कल्याण के लिए निरंतर भ्रमण करनेवालीं संभवतः वे इस पृथ्वी पर एकमात्र महिला संत होंगी । यज्ञ तथा अनुष्ठान के माध्यम से प्राप्त होनेवाली आध्यात्मिक ऊर्जा निश्चित रूप से साधकों की साधना को तथा सज्जनों के धर्मकार्य को गति प्रदान करती है ।

श्री. चेतन राजहंस

किसी भी कार्य को गति देने के लिए शक्ति की आवश्यकता होती है । रामराज्य की स्थापना की प्रक्रिया मुख्य रूप से आध्यात्मिक स्तर से संबंधित होने के कारण रामराज्य की स्थापना को गति देने के लिए आध्यात्मिक ऊर्जा ही आवश्यक है । समष्टि संकल्प से होनेवाले यज्ञ-याग से तथा संपूर्ण भारत में जो भी संत-महात्मा हैं, उनकी तपस्या की ऊर्जा से यह आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त होती है । १७ मई को मुंबई में संपन्न हुआ राजमातंगी महायज्ञ भी साधकों की साधना को गति देनेवाला, जनकल्याण साधनेवाला तथा इस भारतभूमि के चारों ओर देवीतत्त्व का कवच निर्माण करनेवाला था ।

– श्री. चेतन राजहंस, राष्ट्रीय प्रवक्ता, सनातन संस्था  (५.५.२०२६)