‘मुसलमानों के कत्लेआम पर भी फिल्म निर्माता को चलचित्र बनाना चाहिए !’
जब मुसलमानों के साथ अन्याय होता है, तो कम्युनिस्ट, धर्मनिरपेक्षतावादी, बुद्धिजीवी सभी हिंदुओं पर टूट पडते हैं ; किंतु, “सत्य खान” को यह ध्यान रखना चाहिए, कि जब कट्टरपंथी भीषण कांड करते हैं, तो उन्हें ढक दिया जाता है