हिजाब के प्रकरण में दुकानें बंद करने का प्रयास करनेवाले पॉप्युलर फ्रंट ऑफ इंडिया के कार्यकर्ताओं पर अपराध प्रविष्ट
सरकार धमकियों के आगे झुकेगी नहीं ! – उच्च शिक्षामंत्री श्री. अश्वथ नारायण
सरकार धमकियों के आगे झुकेगी नहीं ! – उच्च शिक्षामंत्री श्री. अश्वथ नारायण
बेंगलुरू (कर्नाटक) – ‘श्रीराम सेना’ हिन्दुत्ववादी संगठन के संस्थापक अध्यक्ष श्री प्रमोद मुतालिक ने कर्नाटक उच्च न्यायालय द्वारा हिजाबबंदी कायम रखने के ऐतिहासिक निर्णय का स्वागत किया है । प्रसिद्धि माध्यमों से बात करते हुए उन्होंने कहा, कि हिजाबबंदी का निर्णय संविधाना की विजय है । हिजाब युनिफार्म का भाग नहीं हो सकता । स्कूल … Read more
ईसाई संस्थाओं ने ही हिन्दुओं का धर्मांतर कर समाज में फूट डालने का प्रयास किया, साथ ही शिक्षा के नाम पर छात्रों का वैचारिक धर्मांतर किया।
ह-नक्षत्रों के अनुसार नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री के रूप में १२ वर्षाें तक रहेंगे, महामंडलेश्वर स्वामी यतींद्र आनंद गिरि ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संदर्भ में ऐसी भविष्यवाणी की ।
गुजरात में भाजपा की सरकार होते हुए भी ईसाई मिशनरी ऐसा कृत्य करने का साहस कैसे कर सकती है ? ऐसा प्रश्न हिन्दुओं के मन में आता है !
‘भाजपा के नेताओं और सांसदों के परिवार के सदस्यों को विधानसभा चुनाव में उम्मीदवारी ना मिलने का निर्णय मेरे बताने पर हुआ है । यदि यह पाप है, तो यह मैंने किया है । इतना होने पर भी आप हमारे साथ हैं, इसलिए मैं आपका आभारी हूं’, ऐसा भी मोदी ने इस समय स्पष्ट किया ।
काँग्रेस नेता ने बताया और गांधी परिवार ने सुना, ऐसा कभी होगा क्या ? काँग्रेस में पिछले ७५ वर्षों से परिवारवाद भरा हुआ है, यह इतनी आसानी से कैसे समाप्त होगा ? यह काँग्रेस के साथ ही समाप्त होगा और जनता उसे जल्द ही समाप्त करेगी, यह निश्चित है !
द कश्मीर फाइल्स’ सिनेमा के माध्यम से प्रधानमंत्री की हिन्दू विरोधियों पर कठोर टिप्पणी
केंद्र सरकार ने कश्मीरी हिन्दू हेतु कुछ भी नहीं किया, ऐसा बोलनेवाली राष्ट्रवादी कांग्रेस की सुप्रिया सुळे इतना तो बताएं, कि इतने वर्षाें में उनकी पार्टी ने कश्मीरी हिन्दू हेतु आवाज क्यों नहीं उठाई ?’
मुख्य न्यायाधिश रितुराज अवस्थी जी ने निर्णय देते हुए कहा कि, “यह निर्णय दो बातों पर लिया है । प्रथम, हिजाब पहनना, यह संविधान की धारा २५ अन्तर्गत धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार की क्ष्रेत्र में आता है क्या ? और दूसरी यह कि, विद्यालयों का पोशाक अनिवार्य करना, यह उस अधिकार के विरोध में है क्या ?”