भारत को इस्लामी राष्ट्र बनाने के लिए इस्लामी देशों से ’पी.एफ्.आइ.’ को वित्त (आर्थिक) सहायता !

अब हिन्दुओं के सामने यह प्रश्नचिन्ह है कि केंद्र सरकार ’पॉप्युलर फ्रंट ऑफ इंडिया’ पर बंदी कब लाएगी ?

क्या यह कांग्रेस की आतंकवाद विरुद्ध नीति है ? – भाजपा

यदि अन्सारी सच बोल रहे हैं, तो इसका सीधा अर्थ निकलता है कि तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने स्वयं ही गुप्त सरकारी जानकारी शत्रुराष्ट्र पाक के पत्रकार को दी । इसलिए राष्ट्रप्रेमी नागरिकों को लगता है कि कांग्रेस के संबंधित नेताओं को ढूंढकर ऐसे राष्ट्रद्रोही कृत्य के लिए उन्हें कठोरतम दंड देना चाहिए !

भारत यात्रा के समय एकत्रित की गई जानकारी आई.एस.आई.को प्रदान की !

पाकिस्तान से भारत आने वालों का क्या उद्देश्य है, भारतीयों को अब यह बात समझ आ गई होगी ! यदि ऎसा है तो पाकिस्तानियों को भारत क्यों आने दिया जाय ? अब यह तय करने की नितांत आवश्यकता है !

पाकिस्तान में नाबालिग हिन्दू लड़की का अपहरण

पीडित लडकी को तुरंत नहीं छुडाया गया गया, तो उसका बलपूर्वक धर्मांतरण कर अपहारणकर्ता से उसका विवाह कर दिया जाएगा, ऐसी संभावना ‘व्हॉईस ऑफ पाकिस्तान मायनोरीटी ‘ने ट्विट कर व्यक्त की।

पाक में बकरीद के दिन क्रेन की सहायता से गाय को उठाकर उसे नीचे फेंककर मारने की कुप्रथा !

इस विषय में अंतरराष्ट्रीय एवं प्राणीप्रेमी संगठन चुप क्यों ? इस्लाम में बकरीद को गाय की हत्या करने की कोई प्रथा न होते हुए भी इस प्रकार से की जाने वाली हत्या क्या इस्लाम का अपमान नहीं है ?

पीलीभीत (उत्तरप्रदेश) की दुकानों से पाकिस्तानी जिहादी संगठन ‘दावत-ए-इस्लामी’ के लिए धन इकट्ठा किया जाता है !

जिहादी संगठन के लिए भारत में इस प्रकार धन इकट्ठा किया जाता है । तब सुरक्षातंत्र को इसके विषय में कुछ भी ज्ञात न होना, लज्जाजनक ! आतंकवादी संगठन के लिए पैसे मांगनेवाले और उसके लिए पैसे देनेवाले, ऐसे सभी लोगों पर कठोर कार्रवाई होना आवश्यक !

‘ब्रिक्स प्लस’ परिषद से पाकिस्तान वंचित : भारत पर लगाया दोष

उठते बैठते भारत पर निशाना लगाने वाला पाकिस्तान ! पाकिस्तान को समझ आए, ऐसी भाषा में ही अब भारत ने पाकिस्तान को सबक सिखाना चाहिए !

मुस्लिम प्रत्याशी के विजय के बाद ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के नारे!

भारत में रहकर ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के नारे लगानेवालों को आजीवन कारावास में डालें!

उदयपुर हत्याकांड में सम्मिलित थे २ मौलवी और २ अधिवक्ता !

जिहादी गतिविधियों में उच्च शिक्षित अधिवक्ताओं की भागीदारी को देखते हुए ´´ मुसलमानों को मुख्यधारा में लाकर ही उनकी, अपराधों में हो रही वृद्धि को कम किया जा सकता है? ऎसा तर्क देने वालों का अब क्या कहना है ?

‘हमारे संगठन का किसी आतंकवादी कृत्य से कोई लेना-देना नहीं है!’ – दावत-ए-इस्लामी का दावा

पहले ही यह उजागर हो चुका है, कि इसी संगठन का एक विद्यार्थी फ्रांस में पत्रिका ‘चार्ली हेब्दो’ के कार्यालय पर हुए आक्रमण  में सम्मिलित था। इस दावे पर कौन विश्वास करेगा ? जब यह स्पष्ट हो चुका है  कि कन्हैयालाल के दोनों  हत्यारे कुछ दिनों के प्रशिक्षण के लिए कराची में इसी  संगठन के मुख्यालय में  गए थे ?