उत्तर भारत की प्रथा-परंपराओं में विदेशी आक्रमणों के कारण आए परिवर्तन !

सती प्रथा के कारण हिन्दू धर्म को ‘पिछडा’, ‘स्त्रियों को महत्त्व न देनेवाला’ कहा गया है । अब तत्कालीन स्थिति का विचार किया जाए, तो स्त्री पति के निधन के पश्चात विधवा होती थी, अर्थात वह पति के बिना स्वरक्षा करने में असमर्थ होती थी ।

उचित पद्धति से पैदल चलने पर अच्छा स्वास्थ्य प्राप्त होना !

इस लेख में हम पैदल चलने की उचित एवं अनुचित पद्धतियां तथा उससे होनेवाले लाभ एवं हानि के विषय में समझ लेते हैं ।

विचारों की शृंखला तथा उसका उपाय !

रोगियों में, विशेषकर स्त्री रोगियों में विचार करते रहना सामान्य दिखाई देता है । जिसे हम ‘ट्रेन ऑफ थॉटस्’ कहते हैं, यह विचार एक के पश्चात एक मन को नियंत्रण में लेते हैं तथा उससे काल्पनिक अथवा अतीत के विचारों में जीवन का बहुमूल्य समय व्यर्थ जाता है ।

किसी भी ‘पैथी’ का ‘स्व-उपचार’ न करें !

एक घटना मथुरा में हुई । एक ३२ वर्षीय नवयुवक ने पेटदर्द के इलाज के लिए स्वयं अपनी ही शस्त्रक्रिया (सर्जरी) कर ली !

वास्तु पर कुदृष्टि पडती है अर्थात क्या होता है ?

दूषित वास्तु का व्यक्ति पर होनेवाला परिणाम इन सूत्रों को समझने हेतु पढिए सनातन का ग्रंथ ‘उतारा एवं मानस कुदृष्टि’

फ्रेंच यात्री तावर्निए द्वारा गंगाजी के जल की स्वच्छता के विषय में किया लेखन

गंगा सप्तमी अर्थात गंगोत्पत्ति (३ मई) के उपलक्ष्य में..

वास्तुशास्त्र सहस्रों वर्ष पूर्व वास्तुशास्त्र का गहन अध्ययन करनेवाला महान हिन्दू धर्म !

विदेशों में विकसित वास्तुशास्त्र में वास्तु की मजबूती पर बल दिया गया है, अपितु भारतीय वास्तुशास्त्र में मजबूती के साथ ही उस घर में रहनेवाले व्यक्ति, उनकी मानसिक स्थिति तथा उन व्यक्तियों का ईश्वर के साथ संबंध का भी विचार किया गया है ।

वास्तु आनंददायक हो, इस हेतु सदनिकाओं में (फ्लैट पद्धति में) वास्तुशास्त्र का उपयोग कैसे करें ?

प्रत्येक व्यक्ति को नया घर बनाने का अवसर नहीं मिलता, विशेषकर मुंबई-पुणे जैसे व्यावसायिक शहरों में अब सदनिका ही अधिक संख्या में होती हैं । ऐसी स्थिति में यहां ‘सदनिका में वास्तुशास्त्र का उपयोग कैसे करें ?’, इसकी जानकारी दे रहे हैं ।

सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के वास्तु के संदर्भ में विचार

घर अथवा सदनिका खरीदते समय  उसमें विद्यमान स्पंदन अच्छे हों, तभी उन्हें खरीदें !

वास्तुदोषों के निवारण हेतु सुलभ आध्यात्मिक उपचारों के साथ ‘साधना करना’ सर्वाेत्तम उपाय !

‘वास्तुशास्त्र में अष्टदिशा, पंचमहाभूत तथा वातावरण की ऊर्जा का उचित समन्वय साधकर मनुष्य के लिए शारीरिक, मानसिक एवं आध्यात्मिक स्तरों पर लाभदायक भुवन निर्माण के नियम दिए गए हैं ।