खाद्यपदार्थाें के संदर्भ में विवेक जागृत रखें !

पोषणमूल्यहीन, चिपचिपे, तेल से भरे तथा ‘प्रिजर्वेटिव पदार्थाें का उपयोग किए गए तथा स्वास्थ बिगाडनेवाले पदार्थ खाने की अपेक्षा पौष्टिक, सात्त्विक तथा प्राकृतिक पदार्थ खाने चाहिए । चॉकलेट आदि पदार्थ कभी कभी खाना ठीक है; किंतु नियमित सेवन न करें ।’

व्यायाम कौन सा करें ?

‘व्यायाम करते समय शरीर के मेटाबॉलिस्म में (चयापचय क्रिया) (ऊर्जा निर्मिति की क्रिया) वृद्धि होनी चाहिए । सर्व जोडों में हलचल होनी चाहिए तथा शरीर के स्नायु खिंचे जाने चाहिए ।

शांति से नींद आने लिए ब्राह्मी चूर्ण

चार चम्मच ब्राह्मी चूर्ण ४ कटोरी नारियल तेल में लगभग एक मिनट तक उबालें । ठंडा होने के पश्चात यह तेल छानकर बोतल में डालकर १० ग्राम भीमसेनी कर्पूर का चूर्ण बनाकर डालें तथा बोतल का ढक्कन बंद कर लें । प्रतिदिन रात्रि सोते समय उसमें से १-२ चम्मच तेल सिर पर डालें ।

प्रतिदिन न्यूनतम आधा घंटा व्यायाम करें !

आयुर्वेद के अनुसार उचित समय पर खाना, जितना पचन (हजम) हो, उतना ही खाना, शरीर के लिए अहितकारक पदार्थ टालना, आदि आहार के नियमों का पालन करने से वातादि दोषों के कार्य में संतुलन होकर स्वास्थ्य प्राप्त होता है; किंतु अधिकतर भोजन संबंधी नियम पालन करना संभव नहीं होता ।