अधर्म का उत्तर अधर्म से ही देने की भगवान श्रीकृष्ण की शिक्षा को हिंदुओं द्वारा भुला दिया जाना

‘हमें यह सीख मिलती है कि हमें भी अधर्म के साथ अधर्म से ही युद्ध करना चाहिए। इस इतिहास को भूल जाने के कारण हिंदुओं की स्थिति महाभारत के युद्ध में भ्रमित अजुर् न के समान तथा महम्मद गौरी के हाथों मारे गए पृथ्वीराज चौहान जैसी हो गई है।

नादानुसंधाननादानुसंधान

षट्कर्म, आसन, मुद्रा, बंध एवं प्राणायाम, ये सभी साध्य होने के उपरांत साधक ‘प्रत्याहार’, ‘धारणा’, ‘ध्यान,’ ‘समाधि’ आदि की ओर मुड जाता है । हठयोग में प्रगति करते समय घंटानाद जैसा सूक्ष्म नाद सुनाई देने लगता है ।

धर्मांधों और साम्यवादियों की दोहरी भूमिका को समझना आवश्यक है !

 जब हिन्दू भाई ‘लव जिहाद’ के संकट के विषय में बताते हैं, तब मुसलमान और धर्मनिरपेक्ष विचारधारा के लोग तर्क देते हैं कि ‘विवाह करनेवाली हिन्दू युवती और मुसलमान युवक को किससे विवाह करना है, यह उनका संवैधानिक अधिकार है’;

सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के वास्तु के संदर्भ में विचार

घर अथवा सदनिका खरीदते समय  उसमें विद्यमान स्पंदन अच्छे हों, तभी उन्हें खरीदें !

चाहे हम किसी भी साधनामार्ग से साधना करें, तब भी अखंड साधनारत रहना संभव !

ज्ञानयोगी पढे हुए ज्ञान का चिंतन कर सकता है, कर्मयोगी हो, तो वह प्राप्त परिस्थिति में भी अपेक्षारहित रह सकता है तथा हठयोगी केवल सांस पर ध्यान केंद्रित कर अखंड साधनारत रह सकता है ।

ज्ञान चाहे किसी भी माध्यम से मिले; तब भी वह ईश्वर से ही प्राप्त होने के कारण उससे सीखने में मिलनेवाला आनंद महत्त्वपूर्ण है !

‘साधना में होकर आप हंसमुख नहीं हैं, तो ‘आपकी साधना उचित ढंग से नहीं हो रही है’, ऐसा मान लें तथा प्रयास बढाएं ! –  सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी       

हिन्दू जनजागृति समिति द्वारा अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्री महंत रविन्द्र पुरीजी का सम्मान !

हिन्दू जनजागृति समिति के राष्ट्रीय मार्गदर्शक सद्गुरु डॉ. चारुदत्त पिंगळेजी ने ‘अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद’ के अध्यक्ष श्री महंत रविन्द्र पुरीजी से भेंट की । इस अवसर पर सद्गुरु डॉ. चारुदत्त पिंगले ने श्री महंत रविन्द्र पुरीजी को पुष्पमाला एवं उपहार देकर सम्मानित किया ।

­व्यायाम करने के लिए आयु का कोई बंधन नहीं है !

आपकी आयु चाहे कितनी भी हो; परंतु व्यायाम का आनंद उठाने में विलंब नहीं हुआ है । अपनी स्वयं की क्षमता के अनुसार व्यायाम करना आरंभ करें तथा कोई शारीरिक कष्ट हो, तो व्यायाम का नया प्रकार आरंभ करने से पूर्व डॉक्टर से परामर्श लें !

हिन्दी पाक्षिक ‘सनातन प्रभात’ का द्वितीय रंगीन विशेषांक

प्रभु श्रीराम मंदिर इस विशेषांक में पढें अयोध्या की महिमा , संत संदेश एवं कारसेवकों के अनुभव !

भीषण आपातकाल आरंभ होने से पूर्व ही सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के ग्रंथ-निर्मिति के कार्य में सम्मिलित होकर शीघ्र ईश्वरीय कृपा के पात्र बनें !

ग्रंथसेवा के अंतर्गत संकलन, अनुवाद, संरचना, मुखपृष्ठ-निर्मिति, मुद्रण इत्यादि विभिन्न सेवाओं में सम्मिलित होने की इच्छा रखनेवाले अपनी जानकारी सनातन के जिलासेवक के माध्यम से भेजें ।