आधुनिक जीवनशैली के कारण उत्पन्न होनेवाली शारीरिक समस्याओं का ‘व्यायाम’ एक प्रभावी उपाय है । प्राचीन ग्रंथों में दिए व्यायाम के सिद्धांत आज भी उतने ही उपयुक्त हैं तथा हम उससे प्रेरणा ले सकते हैं । इस लेखमाला से हम व्यायाम का महत्त्व, व्यायाम के विषय में शंकाओं का समाधान, ‘एर्गोनॉमिक्स’ (ergonomics) का सिद्धांत तथा बीमारी के अनुसार उचित व्यायाम की जानकारी देनेवाले हैं । इस लेख में हम पैदल चलने की उचित एवं अनुचित पद्धतियां तथा उससे होनेवाले लाभ एवं हानि के विषय में समझ लेते हैं ।

१. पैदल चलते समय शरीर की स्थिति कैसी होनी चाहिए ?
‘गति से पैदल चलने से लाभ तो मिलता ही है; परंतु उस समय ‘हमारे शरीर की स्थिति कैसी होती है ?’, इसपर उसका परिणाम निर्भर होता है । हमारे जोडों पर किस प्रकार उसका जोर अथवा तनाव पडता है, उन पर उनकी आयु निर्भर होती है । अतः पैदल चलते समय शरीर की उचित स्थिति रखना तथा पैदल चलने की पद्धति का भी उचित होना अति आवश्यक है ।
२. अनुचित पद्धति से पैदल चलने से होनेवाली हानि
वर्तमान समय में संगणकीय कामों के कारण अनेक लोगों को अज्ञातवश कूबड निकालकर बैठने की, साथ ही कुछ लोगों को थोडा झुककर पैदल चलने की आदत लगी है । उसके कारण श्वसनक्रिया, पाचनक्रिया इत्यादि पर दुष्परिणाम तो होता ही है; परंतु उसके कारण अनेक प्रकार की समस्याएं भी उत्पन्न होती हैं ।

३. उचित पद्धति से पैदल चलने से मिलनेवाले लाभ
अ. पाचनक्षमता में सुधार आता है, साथ ही लिवर एवं आंतों की कार्यक्षमता बढती है । उसके कारण बवासीर, गैस, सिरदर्द, सर्दी, दमा जैसी अनेक बीमारियां ठीक होने में सहायता मिलती है ।
आ. सुबह अथवा सायंकाल में खुली हवा में पैदल चलने से नया चैतन्य, उत्साह तथा स्वास्थ्यलाभ होता है ।
४. पैदल चलने की उचित पद्धति
अ. पैदल चलते समय पीठ सीधी तथा कंधे पीछे होने चाहिए । (‘सिर पर एक रस्सी बंधी हुई है तथा वह हमें ऊपर की ओर खींच रही है’, यह कल्पना करने से सीधा होना सरल होता है ।)
आ. पैदल चलते समय हाथों की हलचल प्राकृतिक पद्धति से होना आवश्यक है । उसके कारण पैदल चलने में गति तो मिलती ही है; परंतु साथ ही संपूर्ण शरीर का भी व्यायाम होता है, अन्यथा केवल पैर की कसरत होती रहती है ।
इ. पैर आगे बढाते समय एडी पहले भूमि पर टिकेगी तथा उसके उपरांत उस पैर का पंजा भूमि पर टिकेगा, इस पद्धति से पैर आगे बढाएं । सहजता से पैर आगे बढें, इस पद्धति से पैरों को आगे बढाएं ।
ई. पेट की मांसपेशियां तथा अंगों के लिए जंघा को ऊपर उठाकर पैर आगे बढाना अत्यंत महत्त्वपूर्ण है, साथ ही उससे शरीर पर आवश्यक जोर पडना भी आवश्यक है ।
उ. संभव हो, तो नंगेपांव पैदल चलें तथा ढीले कपडे पहनें ।
५. पैदल चलने के लिए खाना-पीना, ऋतु-काल अथवा समय का कोई बंधन नहीं है ।’
(साभार : मासिक ‘व्यायाम’, शं. धों. विद्वांस, संपादक, १५.२.१९५७)
६. कुछ अनुचित कृतियां
‘वर्तमान में अनेक लोग पैदल चलते हुए पैरों को भूमि से घिसते हुए अथवा घुटने झुकाकर पैदल चलते हैं । उन्हें जंघा को उठाकर आगे बढाना उबाऊ लगता है अथवा उसका ज्ञान नही होने से यह बात उनके ध्यान में नहीं आती ।
७. उपाय
प्रतिदिन पर्याप्त समय न मिलता हो, तो जहां संभव है, वहां वाहन का उपयोग करना टालें, उदा. निकट की दुकान में दोपहिया वाहन के स्थान पर पैदल जाने तथा छुट्टी के दिन अधिक चलने से (उदा. प्रतिदिन ३ – ४ कि.मी. पैदल चलने के स्थान पर छुट्टी के दिन १० – १२ कि.मी. पैदल चलना) सप्ताहभर लाभ मिलता है ।
८. महत्त्वपूर्ण सूचना
किसी व्यक्ति को सांस, हृदय से संबंधित अथवा अन्य कोई बडी बीमारी हो, तो वे चिकित्सकीय सलाह से ही पैदल चलना आरंभ करें ।’
– श्रीमती अक्षता रेडकर, भौतिकोपचार विशेषज्ञ, फोंडा, गोवा. (४.११.२०२४)
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