धर्मांधों और साम्यवादियों की दोहरी भूमिका को समझना आवश्यक है !
जब हिन्दू भाई ‘लव जिहाद’ के संकट के विषय में बताते हैं, तब मुसलमान और धर्मनिरपेक्ष विचारधारा के लोग तर्क देते हैं कि ‘विवाह करनेवाली हिन्दू युवती और मुसलमान युवक को किससे विवाह करना है, यह उनका संवैधानिक अधिकार है’;