जैसे व्यक्ति पर कुदृष्टि पडती है, उस प्रकार वास्तु पर भी कुदृष्टि पडती है । वास्तु पर कुदृष्टि पडने के कारण वास्तु में रहनेवालों को शारीरिक, मानसिक एवं आध्यात्मिक कष्ट होते हैं । घर में अस्वस्थ लगना, नकारात्मक विचारों का स्तर बढना, छोटे-छोटे कारणों से भी घर में विवाद होना, आर्थिक हानि होना, निरंतर कोई बीमार रहना जैसी विभिन्न समस्याएं इसी कष्ट के लक्षण हैं । वास्तु पर कुदृष्टि ही न पडे; इसके लिए आरंभ से प्रयास करना ही यथार्थ सिद्ध होता है ।

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| आध्यात्मिक कष्ट : इसका अर्थ है व्यक्ति में नकारात्मक स्पंदन होना । मंद आध्यात्मिक कष्ट का अर्थ है व्यक्ति में नकारात्मक स्पंदन ३० प्रतिशत से अल्प होना । मध्यम आध्यात्मिक कष्ट का अर्थ है नकारात्मक स्पंदन ३० से ४९ प्रतिशत होना; और तीव्र आध्यात्मिक कष्ट का अर्थ है नकारात्मक स्पंदन ५० प्रतिशत अथवा उससे अधिक मात्रा में होना । आध्यात्मिक कष्ट प्रारब्ध, पितृदोष इत्यादि आध्यात्मिक स्तर के कारणों से होता है । किसी व्यक्ति के आध्यात्मिक कष्ट को संत अथवा सूक्ष्म स्पंदन समझनेवाले साधक पहचान सकते हैं। |
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