
‘किसी भी ‘पैथी’ का ‘स्वउपचार’ न करें’, ऐसा हम सदैव बताते हैं; क्योंकि यह अत्यंत घातक है । ‘एक गलत कदम उठाएं, तो भी ठीक है; परंतु १० गलत कदम उठा लिए, तो अत्यंत ही विकट स्थिति उत्पन्न हो जाती है । हम अपनी ही हानि कर बैठते हैं । ही एक घटना मथुरा में हुई । एक ३२ वर्षीय नवयुवक ने पेटदर्द के इलाज के लिए स्वयं अपनी ही शस्त्रक्रिया (सर्जरी) कर ली ! उसने उसके लिए साधनसामग्री एकत्र की और यू ट्यूब पर वीडियो (दृश्यश्रव्यचक्रिका) देखकर अपने ही पेट को सुन्न (अनेस्थीशिया देकर) कर लगभग ७ इंच का घाव किया (कट लगाया) । वह घाव अधिक गहरा हो जाने से उससे वेग से रक्त बहने लगा । उसे रोकने के लिए उसने लगभग १२ टेढे-मेढे टाके भी लगाए !
तदुपरांत भी वेदना और रक्त बहना रुका नहीं, तब उसने अपने परिवारवालों को बुलाया । उसे तुरंत रुग्णालय में भर्ती करना पडा । मान्य है कि कोई भी पाठक ऐसा कदम नहीं उठाएगा; परंतु छोटे-छोटे कदम भी सुरक्षित हों !
– वैद्य परीक्षित शेवडे, आयुर्वेद वाचस्पति, डोंबिवली.
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के चरणों में कोटि-कोटि प्रणाम !
संपादकीय : आर्थिक अनुशासन
हिन्दू जनजागृति समिति के हिन्दू राष्ट्र संपर्क अभियान अंतर्गत राष्ट्रीय मार्गदर्शक सद्गुरु डॉ. चारुदत्त पिंगळेजी की मध्य प्रदेश यात्रा !
ज्ञानमूर्ति, निर्गुण तत्त्व की नित्य अनुभूति देनेवाले एवं ब्रह्मानंद में निमग्न रहनेवाले सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी
सच्चिदानंद परब्रह्म गुरुदेवजी द्वारा ३० वर्ष पूर्व दिए गए आशीर्वचन को साधक क्षण-क्षण अनुभव कर रहे हैं !
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी एकमेवाद्वितीय एवं अवतारी पुरुष क्यों हैं ?