सप्तर्षि द्वारा सप्तर्षि जीवनाडी-पट्टिकाके माध्यम से श्रीकृष्ण जन्माष्टमी केउपलक्ष्य में साधकों को दिया गया संदेश !

ईश्वर के द्वारा वैकुंठ में किए शंखनाद का स्थूल परिणाम पृथ्वी पर वर्ष २०२५ की श्रीकृष्ण जन्माष्टमी से लेकर वर्ष २०२६ की श्रीकृष्ण जन्माष्टमी तक घटित होनेवाली कुछ वैश्विक घटनाओं के माध्यम से दिखाई देगा ।

भावनाओं की अभिव्यक्ति की अति (ओवरडोज) पाश्चात्यों का अंधानुकरण ही है !

पिछले एक-दो दशकों में भावनाओं की अभिव्यक्ति बढ गई है । अब तो लोग मानो इसमें पागल ही हो चुके हैं । इसकी अर्थहीनता, कारण तथा समाज पर हो रहे उसके दुष्परिणाम इत्यादि सूत्रों को समझना ही इस लेख का प्रयोजन है !

अर्बन (शहरी) नक्सली एवं अर्बन नक्सलवाद : एक गुप्त राष्ट्र घात

आज सबसे गंभीर और संभावित संकट बाहरी शत्रुओं से नहीं, अपितु शहरों के भीतर काम करनेवाले वैचारिक रूप से प्रेरित ‘राष्ट्रघातियों’ से आता है, जो सामान्यतया ‘बौद्धिक कार्यकर्ता’ तथा ‘व्यवसायी’ होते हैं ।

‘लव जिहाद’ राजनीतिक प्रचार नहीं, सच्चाई है !

‘लव जिहाद’ सामाजिक वास्तविकता से संबंधित तथा धर्म एवं राष्ट्रहित की दृष्टि से गंभीर चिंतन का विषय है । अतः उसका अस्तित्व अस्वीकार करने का अर्थ है हिन्दू युवतियों की सुरक्षा की अनदेखी करना !

आम आदमी पार्टी के (‘आप’ के) अरविंद केजरीवाल का राजनीतिक दृष्टि से उदय एवं अस्त !

केजरीवाल ने उनके कार्यकाल के पूरे दशक में देहली के नायब राज्यपाल तथा उनके प्रशासकों को साधारण सूत्रों में तथा कानूनी चुनौतियों में व्यस्त रखा ।

अधूरी नींद लेने तथा व्यायाम न करने के कारण शरीर पर होनेवाले परिणाम तथा उसके समाधान !

इस लेख में हम ‘अधूरी नींद लेने तथा व्यायाम न करने के कारण शरीर पर होनेवाले परिणाम तथा उसके समाधान’ की जानकारी लेते हैं ।

 त्वचा विकारों को न्यून करनेवाला चकवड एवं मधुमेह हेतु गुणकारी कंटोला…

भारत के जंगली पर्वतीय क्षेत्रों में लगभग ४२७ आदिवासी समुदाय हैं । पूरे विश्व में वनस्पतियों की ३२ लाख ८३ सहस्र प्रजातियां हैं । आदिवासी लोग अपने आहार में १ सहस्र ५३० से अधिक वनस्पतियों का प्रतिदिन उपयोग करते हैं ।

वर्षश्राद्ध करने के उपरांत पितृपक्ष में भी श्राद्ध क्यों करें ?

वर्षश्राद्ध करने से उस विशिष्ट लिंगदेह को गति मिलती है, जिससे उसका प्रत्यक्ष व्यष्टि स्तर का ऋण चुकाने में सहायता मिलती है ।

पितृपक्ष में किए जानेवाले श्राद्ध के धर्मपिंड से माता और पिता दोनों के कुल के, ब्रह्मदेव से लेकर स्वयं की पीढी तक के सर्व पितरों को कैसे लाभ होता है ?

ब्रह्मदेव इच्छाशक्ति से संबधित होते हैं । अतः स्वयं को ब्रह्मात्मक इच्छा-ऊर्जा का अंश समझकर आवाहन करने से ब्रह्माण्ड की इच्छातरंगें कार्यरत होती हैं ।

पति से पूर्व मृत स्त्रियों के श्राद्ध पितृपक्ष की नवमी को ही क्यों करें ?

नवमी के दिन ब्रह्माण्ड में रजोगुणी पृथ्वी एवं आप तत्त्वों से संबधित शिवतरंगों की अधिकता होती है…