‘आधुनिक जीवनशैली के कारण उत्पन्न होनेवाली शारीरिक समस्याओं के लिए ‘व्यायाम’ एक प्रभावी उपाय है । इस लेखमाला से हम व्यायाम का महत्त्व, व्यायाम के विषय में शंकाओं का समाधान कर व्यायाम के माध्यम से स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का प्रयास करनेवाले हैं । इस लेख में हम ‘अधूरी नींद लेने तथा व्यायाम न करने के कारण शरीर पर होनेवाले परिणाम तथा उसके समाधान’ की जानकारी लेते हैं ।
(भाग १)

१. नींद के कष्ट के कारण शरीर में स्थित संप्रेरकों (‘हार्मोन्स’) का संतुलन बिगडकर शरीर पर गंभीर परिणाम होना
‘वर्तमान समय में अनेक लोगों को नींद का कष्ट है । कुछ लोगों को बिल्कुल ही नींद नहीं आती, जबकि कुछ लोगों की नींद खंडित होती है । इसके पीछे शारीरिक, मानसिक इत्यादि कारण हो सकते हैं । इसके कारण भले कुछ भी हों, परंतु शरीर पर उसका अच्छा परिणाम नहीं होता । कभी-कभी एक दिन नींद अधूरी हुई अथवा व्यायाम करना चूक गया, तो उससे बहुत कुछ अंतर नहीं आता; परंतु यदि ऐसा करने की आदत लग गई, तो उससे शरीर में स्थित संप्रेरकों का (‘हार्माेन्स’ का) संतुलन बिगडकर शरीर पर उसका गंभीर परिणाम होता है ।
२. एक दिन की छुट्टी में पूरे सप्ताह की अधूरी नींद की भरपाई कर पाना असंभव !
हमें किसी काम की शीघ्रता हो, तो हम प्रतिदिन अल्प नींद लेकर ‘छुट्टी के दिन अथवा काम पूरा होने पर नींद लेंगे’, यह विचार करते हैं । इसका अर्थ हम नींद को ‘उधार’ रखते हैं । ऐसा सोचकर ‘अनेक दिनों की नींद की भरपाई हम एक दिन में पूरी कर लेंगे’, हमें ऐसा लग सकता है; परंतु शरीर वैसा नहीं करता । निरंतर अधूरी नींद लेना शरीर के लिए आपत्तिजनक ही होती है ।

३. कुछ दिन व्यायाम न कर एक दिन के व्यायाम से उसकी भरपाई करना असंभव
‘आज मुझे समय नहीं मिला, तो मैं कल व्यायाम करूंगा, कल संभव नहीं हुआ, तो परसों करूंगा’, ऐसा होता रहता है । एक दिन में पिछले कुछ दिन के व्यायाम की भरपाई नहीं की जा सकती । इस संदर्भ में एक उदाहरण देखेंगे । कोई दुकानदार प्रतिदिन दुकान पर जाता है, तब उसे प्रतिदिन की कमाई होती है । मान लीजिए कि वह ४ दिन दुकान पर नहीं जाकर ५वें दिन दुकान पर गया, तो वह ४ दिन की चूकी हुई कमाई की भरपाई नहीं कर सकता, वैसे ही व्यायाम के संदर्भ में भी है । एक दिन व्यायाम न करने से उससे हमें जो लाभ मिलते हैं, उनसे हम वंचित रह जाते हैं तथा व्यायाम से चूकना जारी रहता है ।
४. शारीरिक स्वास्थ्य को टिकाए रखने हेतु संप्रेरकों की आवश्यकता होनो
शारीरिक स्वास्थ्य को टिकाए रखने हेतु विभिन्न अंगों का कार्य सुचारू रूप से होना कुछ रासायनिक मध्यस्थों के कारण संभव होता है, जिन्हें संप्रेरक (हार्मोन्स) कहते हैं । इन संप्रेरकों के संतुलन से ही सभी अंग उचित मात्रा में तथा उचित समय पर कार्यरत होने से शरीर सुदृढ रहता है । ‘शरीर का आंतरिक संतुलन’ संपूर्णतया इन संप्ररकों के स्तर तथा समय पर निर्भर होता है ।
५. अधूरी नींद तथा व्यायाम न करने के कारण कुछ संप्रेरकों में परिवर्तन आकर शरीर पर उसका विपरीत परिणाम होना
संप्रेरकों के कार्य का हमारी दिनचर्या से बहुत निकट का संबंध है; इसलिए संप्रेरकों के रिसने के समय अथवा स्तर चूक जाने से शरीर को अनेक दुष्परिणाम भोगने पडते हैं । नींद तथा व्यायाम पूरे नहीं हुए, तो ‘कॉर्टिसॉल’, ‘घ्रेलिन’, ‘लेप्टिन’ इत्यादि संप्रेरकों में क्या परिवर्तन आता है ? तथा शरीर पर उसका क्या परिणाम होता है ?, इस विषय में देखते हैं ।
५ अ. ‘कॉर्टिसॉल’
१. नींद एवं व्यायाम अल्प हो, तो ‘कॉर्टिसॉल’ का स्तर बढना : सामान्यरूप से ‘कॉर्टिसॉल’ का स्तर प्रातः अधिक होता है तथा सायंकाल को अल्प होता है । उसके कारण सवेरे मनुष्य जग जाता है तथा रात में उसे नींद आती है ।
नींद एवं व्यायाम अल्प हों, तो ‘कॉर्टिसॉल’ का स्तर रात में भी अधिक रहता है, जिससे मन शांत नहीं रहता तथा नींद आने में विलंब होता है । ‘सायकोन्यूरोएन्डोक्रिनोलॉजी’ ‘जर्नल’ में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार ‘शिफ्ट ड्यूटी’ (रात अथवा दिन, ऐसे बदलते सत्र में काम करना) करनेवालों में सवेरे-सायंकाल में रिसनेवाले संप्रेरकों का संतुलन बिगडा हुआ दिखाई देता है ।
२. शरीर पर होनेवाले परिणाम : ‘‘कॉर्टिसॉल’ का स्तर बढने के कारण चिडचिडाहट होती है, पेट के आसपास चर्बी संग्रहित होती है (सेंट्रल ओबेसिटी) तथा रोगप्रतिरोधक क्षमता अल्प होती है ।
५ आ. ‘घ्रेलिन’ एवं ‘लेप्टिन’ (Ghrelin & Leptin)
१. नींद एवं व्यायाम अल्प होने पर ‘घ्रेलिन’ का स्तर सामान्य से अधिक बढना तथा ‘लेप्टिन’ का अल्प होना : सामान्यरूप से भोजन से पूर्व ‘घ्रेलिन’ का रिसाव बढने से भूख बढती है, जबकि भोजन के उपरांत ‘लेप्टिन’ के रिसाव से पेट भर जाने का अनुभव होता है । नींद एवं व्यायाम अल्प हो, तो ‘घ्रेलिन’ का स्तर सामान्य स्तर से बढता है तथा उसका असमय रिसाव होता है । उसके कारण अधिक तथा असमय (रात में) भूख लगती है । जब ‘लेप्टिन’ अल्प होता है, तब पेट भरने का अनुभव नहीं होता । ‘पब्लिक लाइब्रेरी ऑफ साइन्स’ ‘जर्नल’ में दी जानकारी के अनुसार ५ घंटे से अल्प नींद लेनेवाले लोगों में ‘घ्रेलिन’ बढता है तथा ‘लेप्टिन’ अल्प होता है ।
२. ‘घ्रेलिन’ का स्तर सामान्य से अधिक बढने से तथा ‘लेप्टिन’ अल्प होने से शरीर पर होनेवाले परिणाम : ‘घ्रेलिन’ का स्तर सामान्य से अधिक बढने से तथा ‘लेप्टिन’ के अल्प होने से निरंतर कुछ खाने की इच्छा होती है, वजन बढता है, रक्त में चीनी एवं चर्बी (कोलेस्टेरॉल) बढती है । महिलाओं में ‘घ्रेलिन’ प्रजनन से संबंधित कार्य भी करता है, अतः उसके असंतुलन में वर्तमान समय में महिलाओं को अल्प आयु में ही ‘पॉलिसिस्टिक ओवेरियन डिसीज’, ‘प्री मेंस्ट्रुयल सिंड्रोम’ तथा प्रजनन से संबंधित बीमारियां हो रही हैं ।
५ इ. इंसुलिन (Insulin)
‘इंसुलिन एक संप्रेरक (हार्मोन) है, जिसके कारण रक्तशर्करा कोशिकाओं में प्रवेश कर ऊर्जा उत्पन्न करती है । नींद एवं व्यायाम यदि अल्प हों, तो कोशिकाओं में इंसुलिन के प्रति संवेदनशीलता (इंसुलिन रेजिस्टेंस) अल्प होने से रक्तशर्करा कोशिकाओं में प्रवेश नहीं करती, जिसके परिणामस्वरूप मधुमेह होने की संभावना बढती है तथा थकान होती है । ‘द लैसेट’, ‘जर्नल’ के अनुसार ६ घंटे से अल्प नींद लेने से इंसुलिन के प्रति संवेदनशीलता २०–२५ प्रतिशत से अल्प हो जाती है ।
५ ई. ‘टेस्टोस्टेरोन’ एवं शरीर के विकास के (ग्रोथ) संप्रेरक (Testosterone & Growth Hormone)
ये संप्रेरक सामान्यरूप से मांसपेशियों का विकास, ऊर्जा का अनुभव, शरीर में सुधार तथा पुनर्निर्माण के लिए महत्त्वपूर्ण हैं । नींद एवं व्यायाम अल्प हो, तो पूरी रात ‘टेस्टोस्टेरोन’ एवं ‘ग्रोथ हार्मोन’ की निर्मिति अल्प होती है । उसके कारण थकान होना, मांसपेशियां दुर्बल होना, यौन इच्छा घटना, वृद्धावस्था प्रतीत होना जैसे कष्ट होते हैं । ‘जामा’ नामक ‘जर्नल’ के अनुसार रात में केवल ४ घंटे नींद लेनेवालों में ‘टेस्टोस्टेरोन’ का स्तर १०-१५ प्रतिशत तक अल्प दिखाई देता है ।

६. अधूरी नींद एवं व्यायाम न करने से शरीर पर होनेवाले परिणाम
अ. अनियंत्रित भूख लगना
आ. बहुत चिडचिडाहट होना
इ. बहुत थकान होना, ‘अब वृद्ध हो गया हूं’, ऐसा लगना
ई. प्रजनन से संबंधित क्रियाएं तथा यौन स्वास्थ्य बिगडना
उ. रक्तशर्करा का नियंत्रण छूट जाना
ऊ. मोटापा बढना (विशेषरूप से पेट के आसपास चर्बी बढ जाती है, जो हृदय के लिए बहुत संकटकारी होता है)
७. नींद पूरी न होने से पुनः नींद न आना, साथ ही व्यायाम न करने से थकान बढकर व्यायाम करने में समस्या आना तथा उसके समाधान !
नींद पूरी न होने से पुनः नींद आने में समस्या आती है, साथ ही व्यायाम न करने से थकान बढकर पुनः व्यायाम करने में समस्या आती है । इस प्रकार से यह दुष्टचक्र उत्पन्न होता है तथा उसमें फंस जाने पर उससे बाहर निकलना असंभवसा लगने लगता है; परंतु आगे दी सावधानियां बरतने से हम इस दुष्टचक्र से बाहर निकल सकते हैं ।
अ. आपकी दिनचर्या में न्यूनतम ७ घंटे की नींद पूरी हो, इस पर ध्यान दें । उसके लिए आपको आपके महत्त्वपूर्ण कामों को त्यागना आवश्यक नहीं है; परंतु हम कुछ अन्य बातें टाल सकते हैं, उदा. अनावश्यक दूरदर्शन अथवा चल-दूरभाष देखना ।
आ. प्रतिदिन न्यूनतम १५ – २० मिनट शारीरिक गतिविधि करें, उदा. गति से पैदल चलना, शरीर को तनाव देना (‘स्ट्रेचिंग’) अथवा मांसपेशियों की क्षमता बढानेवाले व्यायाम (‘बॉडिवेट वर्कआउट’) ! केवल शरीर को कठिन लगे, इस प्रकार से अल्पावधि की गतिविधि करना महत्त्वपूर्ण होता है । भारी काम करने को व्यायाम मानना अनुचित है; क्योंकि हमारा पूरा ध्यान व्यायाम एवं शरीर की ओर होना चाहिए, जो काम करते समय संभव नहीं होता ।
इ. नींद अधूरी हुई हो, तो सवेरे हलचल करें । कदाचित पहले के तनाव के कारण ‘कॉर्टिसॉल’ बढने के कारण समय पर सोने से भी अल्प समय ही नींद लगती है । ऐसा होता हो, तो सवेरे जागने पर व्यायाम करने पर बल दें; क्योंकि सवेरे किए जानेवाले व्यायाम से ‘कॉर्टिसॉल’ का संतुलन साधा जाता है तथा उससे मन अधिक जागृत रहता है ।
ई. दिन के अंत में ‘कैफीन’, ‘टैनिन’ तथा भारी अन्न लेना टालें । काम करते समय नींद न आए; इसके लिए अनेक लोग चाय अथवा कॉफी पीते हैं, उसे टालें । चाय में स्थित ‘टैनिन‘ एवं कॉफी में स्थित ‘कैफीन’ के कारण नींद के समय में संप्रेरकों का रिसाव होने में बाधा उत्पन्न होती है, साथ ही नींद के समय पाचन के लिए भारी अन्नपदार्थ खाने से उनका पाचन सुचारू रूप से नहीं होता तथा उससे नींद आने में भी विलंब हो सकता है । अगली बार यदि आपने व्यायाम एवं नींद की अनदेखी करने का मन बनाया हो, तो यह ध्यान में रखें कि नींद एवं व्यायाम का अन्य कोई विकल्प नहीं है । ये दोनों बातें शरीर की आवश्यकताएं हैं, इसे ध्यान में लेकर गंभीरता से नींद पूरी कर नियमित व्यायाम करें !’
– श्री. निमिष म्हात्रे, भौतिकोपचार विशेषज्ञ, फोंडा, गोवा. (२५.६.२०२५)
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