‘लव जिहाद’ राजनीतिक प्रचार नहीं, सच्चाई है !

‘लव जिहाद’ की संकल्पना न्यायालय, सरकार अथवा अन्वेषण अभिकरणों ने तैयार नहीं की है । इस संकल्पना का उपयोग  मुस्लिमद्वेष एवं राजनीतिक ध्रुवीकरण के लिए होता है । कुछ राज्यों ने ‘लव जिहाद’ के विरुद्ध कानून बनाए; परंतु उसमें ‘लव जिहाद’ के सुस्पष्ट प्रमाण अथवा व्याख्या नहीं हैं । ‘लव जिहाद’ एक राजनीतिक प्रचार है, जो समाज में भय एवं विद्वेष फैलाता है । संक्षेप में कहा जाए, तो ‘लव जिहाद’ एक तथ्यरहित तथा राजनीतिक उद्देश्य से फैलाई सामाजिक भय की संकल्पना है’, ‘महाराष्ट्र अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति’ के (अं.नि.स. के) कार्यकर्ता तथा लेखक फारुख गवंडी ने ‘लव जिहाद : भ्रम एवं वास्तविकता’, नामक लेख में ऐसा ही मत व्यक्त किया है । 

अनेक आधुनिकतावादी लोग ‘लव जिहाद’ की संकल्पना मात्र एक राजनीतिक प्रचार होने का आरोप लगाते हैं; परंतु वास्तविकता उनके दावों से भिन्न है । न्यायालय, अन्वेषण अभिकरण तथा विभिन्न राज्य सरकारों की कार्रवाई से समय-समय पर ‘लव जिहाद’ का अस्तित्व स्पष्ट हो चुका है । चाहे श्रद्धा वालकर के शरीर के टुकडे करनेवाला आफताब हो अथवा खुली सडक पर रूपाली चंदनशिवे की गर्दन काटनेवाला इकबाल शेख हो, ये घटनाएं केवल क्रूरता ही नहीं दिखातीं, अपितु एक जिहादी मानसिकता का सूक्ष्म; परंतु भयावह चेहरा उजागर करती हैं । समाज में हो रही ऐसी अनेक घटनाओं की शृंखला देखी जाए, तो ‘लव जिहाद’ मात्र एक कल्पना नहीं है, अपितु वह एक भयावह वास्तविकता है; यह स्पष्ट करती है । इस संदर्भ में केरल एवं कर्नाटक उच्च न्यायालय का निरीक्षण, पुलिस एवं गुप्तचर विभागों के ब्योरे, साथ ही उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात आदि राज्यों द्वारा इसके विरुद्ध बनाए कानून ‘लव जिहाद’ की वास्तविकता रेखांकित करते हैं । इसलिए ‘लव जिहाद’ सामाजिक वास्तविकता से संबंधित तथा धर्म एवं राष्ट्रहित की दृष्टि से गंभीर चिंतन का विषय है । अतः उसका अस्तित्व अस्वीकार करने का अर्थ है हिन्दू युवतियों की सुरक्षा की अनदेखी करना !

संकलनकर्ता : श्री. सुनील घनवट, महाराष्ट्र एवं छत्तीसगढ राज्यों के संगठक, हिन्दू जनजागृति समिति

१. कर्नाटक एवं केरल में लव जिहाद की सैकडों घटनाएं !

कुछ वर्ष पूर्व केरल उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के.टी. शंकरन् ने लव जिहाद का अस्तित्व मान्य कर उस समय के केरल के तत्कालीन मुख्यमंत्री अच्युतानंदन् को उसकी जांच करने के आदेश दिए थे । उस समय केरल में लव जिहाद की सैकडों घटनाएं हुई थीं । कुछ वर्ष पूर्व कर्नाटक उच्च न्यायालय में लव जिहाद की शिकार हुई एक युवती ने अभियोग प्रविष्ट किया था । इस अभियोग के अंतर्गत कर्नाटक के आपराधिक जांच विभाग द्वारा (‘सीआईडी’ द्वारा) जांच करने पर ‘केवल कर्नाटक में प्रतिवर्ष ३६ सहस्र हिन्दू लडकियां लव जिहाद के जाल में फंसाई जाती हैं’, ऐसी वास्तविकता सामने आई । केरल के पूर्व मुख्यमंत्री ओमान चंडी ने ‘लव जिहाद’ के संदर्भ में २५ जून २०१४ को केरल विधानसभा में इसके आंकडे दिए थे । उसमें उन्होंने ‘वर्ष २००६–२०१४ की अवधि में केरल में २ सहस्र ६६७ युवतियों द्वारा इस्लाम स्वीकार करने’ का उल्लेख किया था । तो इस संदर्भ में और कौनसा प्रमाण चाहिए ?

२. लव जिहाद के लिए अनेक पद्धतियों का उपयोग करनेवाले कुटिल धर्मांध !

‘भारत में प्रतिवर्ष सहस्रों हिन्दू लडकियां लव जिहाद का शिकार बनाई जाती हैं’, यही वास्तविकता है । कुछ समय पूर्व हिन्दू धर्म की किस जाति की लडकी को लव जिहाद के जाल में फंसानेवाले मुस्लिम युवक को कितने लाख रुपए का पुरस्कार मिलेगा, इसकी एक मूल्यसूची ही प्रकाशित हुई थी । ‘हिन्दू लडकियों को लव जिहाद के जाल में फंसाने के लिए साम, दाम, दंड एवं भेद, इन सभी पद्धतियों का उपयोग किया जाता है’, ऐसा भी सामने आया है । मुस्लिम युवक हिन्दू नाम एवं हिन्दू वेशभूषा धारण कर माथे पर तिलक लगाते हैं, जिससे अनेक हिन्दू लडकियां लव जिहाद का शिकार बन जाती हैं । राष्ट्रीय स्तर की निशानेबाज तारा सहदेव वर्ष २०१४ में ‘रणजीत कोहली’ उपाख्य रकीबुल हसन के लव जिहाद के जाल में फंस गई । उसने तथा उसकी मां ने स्वयं को हिन्दू दिखाया । उसने तारा सहदेव के साथ विवाह कर उसका दोहन किया । लव जिहाद के इस जाल में चिकित्सकीय क्षेत्र, न्यायदान करनेवाली महिलाएं, ‘आई.ए.एस.’ (भारतीय प्रशासनिक सेवा की) तैयारी करनेवाली तथा अन्य क्षेत्रों में काम करनेवाली हिन्दू युवतियां भी फंस रही हैं; इसलिए यह बहुत ही गंभीर विषय है । हरियाणा के वल्लभगढ के अगरवाल महाविद्यालय के प्रवेशद्वार के बाहर तौसीफ नामक धर्मांध ने गोलियां मारकर हिन्दू युवती निकिता तोमर की हत्या कर दी । आज यदि ‘लव जिहाद’ का कानून होता, तो निकिता तोमर जीवित होती । जो लोग ‘लव जिहाद के अस्तित्व को अस्वीकार’ करते हैं, वही ऐसा बोलते हैं, उन लोगों को निकिता तोमर की हत्या के लिए उत्तदायी कौन है ?, इसका उत्तर देना चाहिए ।

श्री. सुनील घनवट

३. हिन्दू लडकियों को लालच देकर उन्हें धर्म-परिवर्तन करने के लिए बाध्य करनेवाला छांगूरबाबा !

ताजा उदाहरण लेना हो, तो हम जमालुद्दीन उपाख्य ‘छांगूरबाबा’ का उदाहरण ले सकते हैं । उत्तर प्रदेश के आतंकवाद विरोधी दल ने धर्मांतरण के सूत्रधार ‘छांगूरबाबा’ को ५ जुलाई २०२५ को बलरामपुर से बंदी बनाया । उसकी जानकारी देनेवाले पर ५० सहस्र रुपए का पुरस्कार रखा गया था । जमालुद्दीन अर्थात छांगूरबाबा स्वयं को हाजी पीर जमालुद्दीन कहलवाता था । वह हिन्दू लडकियों को लालच देकर उन्हें धर्म-परिवर्तन करने के लिए बाध्य करता था । इसमें विशेष बात यह है कि उसने युवतियों के धर्मांतरण के लिए मूल्य निर्धारित किए थे । ब्राह्मण समुदाय की युवती के लिए १५ से १६ लाख रुपए ओबीसी समुदाय की युवती के लिए १० से १२ लाख रुपए, जबकि अन्य समाज की युवती के लिए ८ से १० लाख रुपए मूल्य था । इस काम को संपन्न कराने के लिए अधिकोष के उसके खातों में १०० करोड रुपए जमा थे । जमालुद्दीन ने पाकिस्तान सहित अनेक मुस्लिम देशों की यात्रा न्यूनतम ४० बार की है । उसने ‘शिजर-ए-तैयबा’ नामक एक पुस्तक भी प्रकाशित की है । इस पुस्तक का उपयोग कर वह हिन्दुओं का दिशाभ्रम करता था । पुलिस को यह भी जानकारी मिली है कि छांगूरबाबा की योजना उत्तर प्रदेश के जिलों की जनसंख्या की रचना बदलकर वहां इस्लामी राष्ट्र की स्थापना करने की थी ।

४. ‘लव जिहाद’ के संदर्भ में ब्योरा !

देश में हो रही ‘लव जिहाद’ की घटनाओं के संदर्भ में एक ब्योरा सामने आया है । इसके अनुसार ५३ प्रतिशत लोगों ने बताया कि मुस्लिम पुरुष ‘लव जिहाद’ में संलिप्त हैं । इस सर्वेक्षण में १ लाख ४० सहस्र लोगों के मत विचार में लिए गए थे । ‘इंडिया टुडे’ एवं ‘सी वोटर’ ने ‘मूड ऑफ द नेशन’ के अंतर्गत यह सर्वेक्षण किया था । इसमें ‘इंडिया टुडे’ ने १ लाख ४० सहस्र ९१७ लोगों से प्रश्न पूछे, जबकि ‘सी वोटर’ ने १ लाख ५ सहस्र लोगों से भेंटवार्ता कर उसका विश्लेषण कर उसके उपरांत उक्त निष्कर्ष निकाला ।

५. प्रमाण एवं सच्चाई सामने होते हुए भी उसे अस्वीकार करना !

फारुख गवंडी जैसे लेखक ‘लव जिहाद’ को भले ही अस्वीकार करते हों, तब भी केरल उच्च न्यायालय, कर्नाटक राज्य आपराधिक अन्वेषण अभिकरण तथा अन्य अभिकरणों ने सुस्पष्टता से इसकी पुष्टि की है । उत्तर प्रदेश, गुजरात एवं मध्य प्रदेश, इन राज्यों ने लव जिहाद विरोधी कानून बनाए हैं, इससे स्पष्ट है कि लव जिहाद का अस्तित्व है । अनेक समाचार पत्र अब लव जिहाद के टैरिफ को (किस जाति-धर्म की लडकी को लव जिहाद में फंसाने पर कितने पैसे मिलेंगे, इस संदर्भ में मुसलमानों द्वारा तैयार किया गया पत्रक) प्रकाशित कर रहे हैं । कानून की दृष्टि से ही देखा जाए, तो लव जिहाद के अनेक प्रमाण उपलब्ध हैं । अतः प्रश्न यही है कि प्रमाण एवं सच्चाई सामने होते हुए भी कुछ लोगों ने सच्चाई को न मानने की हठधर्मिता (कडी भूमिका) क्यों अपना रखी है ?

६. धार्मिक युद्ध की एक गुप्त रणनीति !

‘लव जिहाद’ धार्मिक युद्ध की एक गुप्त रणनीति है । इस्लामी आक्रमणों के अंतर्गत ‘माल-ए-गनीमत’ की संकल्पना का आधुनिक अवतार है लव जिहाद ! साम, दाम, दंड एवं भेद, इन नीतियों से हिन्दू युवतियों को लव जिहाद में फंसाकर उनका धर्मांतरण, उनका दोहन तथा उन पर अत्याचार जिहादी मानसिकता के विकृत स्वरूप हैं । भारत की राजधानी देहली में वर्ष २०२२ में आफताब अमीन पूनावाला ने उसकी हिन्दू प्रेमिका श्रद्धा वालकर के ३५ टुकडे कर दिए थे । इसमें श्रद्धा की हत्या ही एकमात्र प्रकरण नहीं है, अपितु उसके पूर्व तथा उपरांत भी निधि गुप्ता, अंकिता सिंह, निकिता तोमर, काजल, मानसी दीक्षित, तनिष्का शर्मा, खुशी परिहार, वर्षा चौहान, हीना तलरेजा आदि हिन्दू युवतियों के साथ इसी प्रकार की क्रूरता की गई है ।

‘द केरल स्टोरी’ फिल्म में लव जिहाद की वास्तविकता केवल केरल राज्य तक सीमित नहीं है, अपितु इस जिहादी षड्यंत्र की गहनता पूरे देश में बडे स्तर पर सामने आ रही है । वर्तमान समय में लव जिहाद की तथा महिलाओं पर हो रहे अत्याचारों की घटनाएं प्रतिदिन बढ रही हैं । अनेक लडकियों के शव बंद सूटकेस में मिले हैं । तब भी देश के धर्मनिरपेक्षतावादियों के कहने के अनुसार यह ‘लव जिहाद’ नहीं है ! ऐसा यदि इन लोगों का कहना हो, तो उसे क्या कहा जाए ? ‘लव जिहाद’ की लगभग प्रत्येक घटना के गहन निरीक्षण में यह सामने आया है कि ‘जब कोई युवती ‘लव जिहाद’ का शिकार बनती है, उस समय उसके पीछे एक व्यापक समूह होता है ।’ इसके अपवाद हो सकते हैं; परंतु अपवादात्मक घटनाएं बहुत न्यून हैं । इसीलिए ‘लव जिहाद’ का अस्तित्व अमान्य करना वास्तविकता की दृष्टि से उचित नहीं होगा ।

७. तत्काल कठोर कानून बनाने की आवश्यकता !

‘द केरल स्टोरी’ के निर्माता विपुल शाह धर्मांतरण का शिकार हुई २६ पीडित लडकियों को समाज के सामने लेकर आए थे । पत्रकार सम्मेलन के माध्यम से यह सिद्ध होता है कि इन २६ पीडित लडकियों का प्रकरण समाज के सामने आने से ‘धर्मांतरण एवं आतंकवाद का अस्तित्व है’, यह पूरी तरह से सिद्ध होता है ! २० वर्ष पूर्व से पूरे देश में खुलेआम ऐसी घटनाएं हो रही थीं । उसकी भयावहता अधिक होते हुए भी दुर्भाग्यवश राजनीतिक पटल पर गत अनेक वर्षाें से यह आक्रमण अस्वीकार किया जाता रहा है । ‘लव जिहाद’ की संकल्पना के प्रति अतिरंजित दृष्टिकोण न रखते हुए प्रत्यक्ष घटनाएं, पीडितों के अनुभवों तथा अन्वेषण अभिकरण की प्रविष्टियों की ओर गंभीरता से देखना आवश्यक है ।

इस संबंध में घटित अनेक घटनाओं की वास्तविकता, न्यायालयों के निरीक्षण, अन्वेषण अभिकरण के निष्कर्ष तथा राज्यों में बनाए कानून, सभी एक ही बात स्पष्ट करते हैं कि ‘लव जिहाद’ कोई काल्पनिक संकल्पना नहीं है, अपितु वह एक संगठित एवं योजनाबद्ध षड्यंत्र है । इस विषय में निष्क्रिय रहने का अर्थ है भविष्य की सहस्रों श्रद्धा, निकिता, अंकिता आदि को मृत्यु की खाई में ढकेलना ! इसके लिए केंद्र तथा राज्य सरकारों को तत्काल ‘लव जिहाद’ की संकल्पना पर आधारित संवैधानिक, कठोर एवं प्रभावशाली कानून बनाने चाहिए तथा दलगतनिष्ठा से परे जाकर निष्पक्षता से इन कानूनों का कार्यान्वयन होना चाहिए, यही राष्ट्रप्रेमियों की अपेक्षा है !

– श्री. सुनील घनवट, महाराष्ट्र एवं छत्तीसगढ राज्यों के संगठक, हिन्दू जनजागृति समिति (१.८.२०२५)