त्वचा विकारों को न्यून करनेवाला चकवड एवं मधुमेह हेतु गुणकारी कंटोला…

इस पखवाडे की सब्जी वनशाक

भारत के जंगली पर्वतीय क्षेत्रों में लगभग ४२७ आदिवासी समुदाय हैं । पूरे विश्व में वनस्पतियों की ३२ लाख ८३ सहस्र प्रजातियां हैं । आदिवासी लोग अपने आहार में १ सहस्र ५३० से अधिक वनस्पतियों का प्रतिदिन उपयोग करते हैं । इसमें मुख्यतः १४५ कंद, ५२१ हरी सब्जियां, १०१ फूल सब्जियां, ६४७ फल सब्जियां, ११८ बीजों की तथा सूखे मेवे की प्रजातियां हैं । ये आदिवासी ऋतु के अनुसार वनशाकों का अपने आहार में उपयोग करते हैं ।

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(भाग २)  

चकवड (कैसिया तोरा)

१. चकवड (कैसिया तोरा) सब्जी की जानकारी

यह वनस्पति मुख्यतः वर्षा ऋतु में सर्वत्र उगती है । बंजर भूमि, खेत, बाग, जंगल तथा सडक के किनारे कहीं भी बढ जाती है । सभी प्रकार के चर्मरोगों में यह वनस्पति अत्यंत उपयुक्त है । चमडी भारी होने पर यह वनस्पति खाने से विशेष लाभ होता है ।

उकवत एलर्जी, सोराइसिस, दाद-खाज जैसे चर्मरोग भी इससे स्वस्थ होते हैं । सब्जी के रूप में इसके पत्तों का सेवन करने से पेट के कृमि नष्ट होते हैं । जिन बच्चों के दांत आने लगते हैं, उन्हें बुखार आता है । ऐसे समय में चकवड के पत्तों का काढा उसे नियंत्रित करता है । पित्त, हृदय की बीमारी, दमा, खांसी आदि बीमारियों पर इसके पत्तों का रस शहद में मिलाकर दिया जाता है ।

यह सब्जी मूलतः गर्म गुणधर्म की होने के कारण उससे शरीर में स्थित वात एवं कफ दोष अल्प होने में सहायता मिलती है । इससे वर्षा ऋतु में शरीर में होनेवाली खुजली भी अल्प होती है । अर्थात ये सभी उपाय विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में करने आवश्यक हैं ।

अ. सब्जी बनाने की पद्धति : सब्जी के लिए इस वनस्पति में फूल आने के पूर्व के कोमल पत्ते लें । पत्तों को धोकर पानी रिसने दें । कढाई में तेल डालकर प्याज भूनकर सरसों का तडका दें । उसमें रुचि के अनुसार अथवा आवश्यकता के अनुसार हरी मिर्च अथवा मिर्च पाउडर डालें एवं हलदी डालें । उसके उपरांत उस पर सब्जी डालकर उसे भाप पर पकने दें । जब सब्जी पक रही हो, तब थोडासा गुड एवं नमक डालें । कद्दूकस किया गीला (कच्चा) नारियल डालें । सब्जी पकते समय उसमें भिगोई हुई तुअर (अरहर) की दाल अथवा कटहल के बीजों के छोटे टुकडे डालने से वह अधिक स्वादिष्ट बनती है । केवल लहसुन की कलियों एवं हींग का तडका देकर इस सब्जी को और स्वादिष्ट बनाया जा सकता है ।

शहर में रहनेवाले लोगों को वनशाक के नाम तथा उसके लाभ ज्ञात नहीं होते । अनेक बार उनके स्वाद कुछ अलग होने के कारण ग्राहक ये सब्जियां नहीं खरीदते । इस लेखमाला के कारण आपको नए सिरे से इन सब्जियों का परिचय हुआ होगा । यही हमारा उद्देश्य भी है ।

श्री. प्रशांत सातपुते

२. मधुमेह के रोगियों के लिए गुणकारी कंटोला (ककोडा)

कंटोला (ककोडा)

गोल मटोल हरी पीली-सी ‘कंटोला’ विशेषकर वर्षा ऋतु में हमें देखने को मिलती है । इसे ककोडा, मीठा करेला जैसे स्थानीय नामों से भी जाना जाता है । कंटोला के पत्ते बुखार, दमा, हिचकी, बवासीर जैसी बीमारियों में लाभकारी होते हैं । मधुमेह के लिए गुणकारी इस सब्जी का नियमित सेवन करने से रक्तशर्करा अल्प होती है ।

अ. सब्जी बनाने की पद्धति : कोमल हरा कंटोला पहले आधा काटकर उसके बीज तथा गूदा बाहर निकालें । आलू के फांक की भांति उसे काट लें । कढाई में तेल गरम कर उसमें हींग, सरसों तथा थोडासा जीरा डालकर तडका दें । उसमें कटी हुई हरी मिर्च डालें । उसके पश्चात प्याज, नमक, थोडीसी लाल मिर्च पाउडर तथा हलदी डालकर हिलाएं । उसमें कटा हुआ कंटोला डालकर पुनः अच्छे से मिलाएं । कढाई पर ढक्कन डालकर उसमें अच्छी भाप आने दें । उसके उपरांत ढक्कन हटाकर धीमी आंच पर बिना पानी डाले ३ से ४ मिनट तक सब्जी को हिलाएं । ऊपर से गीला (कच्चा) नारियल तथा आवश्यकता के अनुसार चीनी मिलाएं । इस तैयार सब्जी का मजे से स्वाद लें तथा संतुष्टि की डकार दें । मानवी आहार में प्रमुखता से वनस्पतियों का समावेश होता ही है । इसमें जब यह कंटोला मिलेगा, तब उसका अधिक से अधिक समावेश करने में कोई आपत्ति नहीं है । इसके कारण नई पीढी को भी इन वनशाक में रुचि उत्पन्न होने में सहायता मिलेगी ।

– श्री. प्रशांत सातपुते, जिला सूचना अधिकारी, रत्नागिरी (महाराष्ट्र).