(कहते हैं) ‘मंदिर यह सरकार की संपत्ति है !’
राज्य के चर्च और मस्जिदें सरकार की संपत्ति नहीं है क्या ? केवल हिन्दुओं के मंदिरों को सरकार की संपत्ति कहने वाले मुगलों के वंशज काँग्रेसियों को ध्यान में रखें और चुनाव के समय सबक सिखाएं !
राज्य के चर्च और मस्जिदें सरकार की संपत्ति नहीं है क्या ? केवल हिन्दुओं के मंदिरों को सरकार की संपत्ति कहने वाले मुगलों के वंशज काँग्रेसियों को ध्यान में रखें और चुनाव के समय सबक सिखाएं !
अब पूरे देश में सरकारीकरण किए गए मंदिरों के विरोध में सभी पुजारी, धार्मिक संगठन और हिन्दुत्वनिष्ठ संगठनों को एकत्रित होकर आंदोलन करना चाहिए तथा देश के प्रत्येक मंदिर को सरकारीकरण से मुक्त करना चाहिए !
मद्रास उच्च न्यायालय ने स्पष्ट शब्दों में कहा था कि ‘मंदिर का स्वर्ण पिघलाने संबंधी निर्णय लेने का अधिकार केवल विश्वस्तों को है ।’ इस पर राज्य सरकार ने न्यायालय को लिखित आश्वासन दिया है कि ‘विश्वस्त की नियुक्ति की जाएगी ।’
धर्मांतरण विरोधी कानून की भी मांग !
इससे यह स्पष्ट होता है, कि तीर्थ क्षेत्रों के सरकारीकरण के विरोध में हिन्दुओं की भावनाएं कितनी प्रखर हैं ! क्या केंद्र और सभी राज्य सरकारें अब मंदिरों का व्यवस्थापन भक्तों को सौंपेगी ?
मंदिरों के धन का अनुचित उपयोग करना भी एक अपराध ही है । राज्य सरकार को इस विषय में संबंधित लोगों के विरुद्ध अपराध प्रविष्ट कर अभियोग चलाना चाहिए ।
जानिए मंदिर सरकारीकरण के दुष्परिणाम ! न केवल मध्य प्रदेश में, अपितु, भारत भर में अनेक मंदिरों की भूमि को इस प्रकार हडपा जा रहा है । इस कदाचार को रोकने के लिए, मंदिरों का सरकारीकरण समाप्त होना चाहिए !
मस्जिदों और चर्च का सरकारीकरण कर, उससे प्राप्त धन का उपयोग मौलिक सुविधाओं के लिए करने का विचार धर्मनिरपेक्ष सरकारों द्वारा क्यों नहीं किया जाता ? क्या द्रमुक की सरकार इसका उत्तर देगी ?
तमिलनाडु में मनमानी से मंदिरों के संबंध में निर्णय लेने वाली द्रमुक सरकार का निषेध । तमिलनाडु में हिन्दुओं को इसके विरोध में संगठित होकर संवैधानिक मार्ग से लडना चाहिए !
मंदिर सरकारीकरण के विरोध में आंदोलन करने का निर्णय लेने वाली श्री राजपूत करणी सेना का अभिनंदन ! मंदिरों का सरकारीकरण कर उसकी आय पर डाका मारने की इच्छा रखने वाली कांग्रेस सरकार के विरोध में हिन्दुओं का संगठित होना आवश्यक !