बेलूरु (कर्नाटक) नगर में श्री गणेश की मूर्ति को अज्ञात लोगों द्वारा चप्पलों का हार पहनाए जाने से तनाव

कर्नाटक में हिन्दुओं द्वारा ही चुनकर दिए गए कांग्रेस के शासन के कारण हिन्दुओं की धार्मिक भावनाओं को आहत करने का निरंतर प्रयास किया जा रहा है, यह हिन्दुओं के लिए लज्जाजनक है !

Ganeshotsav : संपूर्ण महाराष्ट्र गणराय (गणपति)के स्वागत के लिए तैयार l

इस समय पूरे महाराष्ट्र में गणेशोत्सव को लेकर उल्लास तथा उत्साह का वातावरण है । जगह-जगह खरीदारी की तैयारियां चल रही हैं, गणेशोत्सव मंडप बप्पा के स्वागत हेतु सज्ज हो चुके हैं ।

श्री गणेश चतुर्थी की अवधि में आवश्यक उपासना का शास्त्र

गणेशोत्सव में धर्माचरण का संकल्प लेना ही श्री गणेश की खरी उपासना सिद्ध होगी !

श्री गणेश की उपासना का अध्यात्मशास्त्र समझने हेतु सनातन का ग्रंथ एवं लघुग्रंथ !

शुभकार्य में प्रथम श्री गणेशपूजन क्यों करते हैं ?

गणेशोत्सव का आरंभ श्री गणेश चतुर्थी को ही क्यों ?

गणेश तृतीया, गणेश पंचमी अथवा गणेश सप्तमी के दिन क्यों नहीं मनाई जाती ? तत्त्ववेत्ता पुरुषों की भावना एवं मान्यता यह है कि मनुष्य में सत्त्व, रज एवं तम ये ३ गुण होते हैं । उन्हें सत्ता दिलानेवाला चैतन्य चौथा है ।

मोदक

‘मोद’ का अर्थ है आनंद तथा ‘क’ का अर्थ है छोटा सा अंश ! मोदक का अर्थ है आनंद का छोटा सा अंश !

प्रथम नमन आपको गणेशजी !

श्री गणपति में शक्ति, बुद्धि एवं संपत्ति, ये तीन सात्त्विक गुण हैं । वे भक्तों पर अनुकंपा करनेवाले हैं । श्री गणपति विद्या, बुद्धि एवं सिद्धि के देवता हैं । वे दुखहरण करनेवाले हैं; इसीलिए प्रत्येक मंगलकार्य के आरंभ में श्री गणेश की पूजा की जाती है । विद्यारंभ में तथा ग्रंथारंभ में भी श्री गणेश का स्तवन करते हैं ।

Ganesh Visarjan : धर्मशास्त्रानुसार श्री गणेशजी की मूर्ति विसर्जन करने का शास्त्र 

श्री गणेश चतुर्थी के समय हम शास्त्रानुसार श्रीगणेश जी की विधिविधान से पूजा करते हैं । जिसके परिणामस्वरूप श्री गणेशजी की मूर्ति में अधिकाधिक श्री गणेश तत्त्व तथा चैतन्य आकर्षित होता है । जब वह मूर्ति हम बहते जल में प्रवाहित करते हैं तब उसका चैतन्य बहते जल के द्वारा दूर दूर तक पहुंचता है ।

Ganesh Chaturth : गणेश जी को गुडहल का लाल पुष्प अर्पित करें !

लाल रंग के गुडहल के पुष्प के रंगकणों एवं गंधकणों के कारण ब्रह्मांड से गणेशतत्त्व उसकी ओर आकर्षित होते हैं ।

Ganeshotsav : श्री गणेशजी को दूर्वा अर्थात दूब घास क्यों चढाई जाती है ?

गणपति को अर्पित की जानेवाली दूर्वा कोमल होनी चाहिए । दूर्वा की पत्तियां ३, ५, ७ अथवा २१ की विषम संख्या में हों ।