विसर्जित श्रीगणेशमूर्तियों के ‘पीओपी’ से बनाई जाएंगी चौकियां (बेंच), ईंटें तथा सुशोभन की वस्तुएं !
यदि पीओपी के कारण प्रदूषण नहीं होता है, तो उसके निस्तारण के लिए इतना अथक प्रयास क्यों ? तथा कृत्रिम कुंडों की योजना भी किसलिए ? यदि प्रदूषण होता ही नहीं है, तो प्राकृतिक जलस्रोतों में भी श्रीगणेशमूर्तियों का विसर्जन करने देने में क्या कठिनाई है ?