रक्षाबंधन का आध्यात्मिक उद्देश्य !

रक्षाबंधन के दिन बहन भाई के हाथ में राखी का धागा बांधती है । चित्त में यदि शुद्ध एवं अच्छी भावनाएं न हों, तो राखी केवल एक धागा बनकर रह जाती है । यदि अच्छी पवित्र, दृढ एवं सुंदर भावना हो, तो वही कोमल धागा बडा चमत्कार करता है ।

श्रावणमास में अध्यात्मप्रसार की दृष्टि से निम्न प्रयास कर गुरुकृपा संपादन करें !

‘५.८.२०२४ से श्रावणमास आरंभ हो रहा है । इस काल में नागपंचमी, श्रावणी पूर्णिमा/राखी पूर्णिमा, श्रीकृष्ण जयंती, गोपाळकाला तथा बैलपूजा; ये त्योहार आते हैं । इस अवधि में अध्यात्मप्रसार की दृष्टि से प्रयास किए जा सकते हैं

नागपंचमी पर नागपूजन का महत्त्व

नागपंचमी के दिन कुछ न काटें, न तलें, चूल्हे पर तवा न रखें इत्यादि संकेतों का पालन बताया गया है । इस दिन भूमिखनन न करें ।

चातुर्मास काल में साधना का महत्त्व

परमार्थ हेतु पोषक तथा ईश्वर के गुणों को स्वयं में अंतर्भूत करने हेतु नामजप, सत्संग, सत्सेवा, त्याग, प्रीति इत्यादि सभी कृत्य करना, साथ ही गृहस्थी एवं साधना के लिए मारक तत्त्वों का अर्थात षड्‌रिपुओं का निषेध करना, चातुर्मास के ये दो मुख्य उद्देश्य हैं ।

अक्षय तृतीया के अवसर पर उससे संबंधित धार्मिक कृत्य कैसे करें एवं उसका लाभ क्या है ?

हिन्दू धर्म के साढे तीन शुभमुहूर्ताें में से एक है वैशाख शुक्ल तृतीया । इसीलिए इसे ‘अक्षय तृतीया’ कहते हैं । इस तिथि पर कोई भी समय शुभमुहूर्त ही होता है । इस वर्ष अक्षय तृतीया १० मई २०२४ को हैं ।

अक्षय तृतीया के पर्व पर ‘सत्पात्र दान’ देकर ‘अक्षय दान’ का फल प्राप्त करें !

‘अक्षय तृतीया’ हिन्दू धर्म के साढेतीन शुभमुहूर्ताें में से एक मुहूर्त है । इस दिन की कोई भी घटिका शुभमुहूर्त ही होती है । इस दिन किया जानेवाला दान और हवन का क्षय नहीं होता; जिसका अर्थ उनका फल मिलता ही है । इसलिए कई लोग इस दिन बडी मात्रा में दानधर्म करते हैं ।

श्रीराम नवमी एवं हनुमान जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं !

श्रीराम नवमी के दिन रामतत्त्व सामान्य की तुलना में १ सहस्र गुना सक्रिय रहता है । इस बढे हुए तत्त्व का लाभ लेने हेतु श्रीराम नवमी के दिन ‘श्रीराम जय राम जय जय राम ’ नामजप तथा प्रार्थना एवं श्रीराम की अन्य उपासना अधिकाधिक करें ।

श्रीराम नवमी एवं हनुमान जयंती के निमित्त उनके विषय में कुछ विशेष जानकारी…

देवताओं एवं अवतारों की जन्मतिथि पर उनका तत्त्व भूतल पर अधिक सक्रिय रहता है । श्रीरामनवमी के दिन रामतत्त्व सामान्य की तुलना में १ सहस्र गुना सक्रिय रहता है ।

नववर्षारंभ के निमित्त सनातन संस्था द्वारा प्रवचन

चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के दिन ही ब्रह्मदेव ने ब्रह्मांड की निर्मिति की । उनके नाम से ही ‘ब्रह्मांड’ नाम प्रचलित हुआ । इसका महत्त्व क्या है तथा इसे कैसे मनाना चाहिए, इसके बारे में सनातन संस्था की ओर से यहां के नक्की घाट स्थित त्रिदेव मंदिर में श्रद्धालुओं को मार्गदर्शन किया ।

हिन्दू धर्म के त्योहारों का शास्त्र समझें और विकृतियों को दूर कर आनंद लें । – आनंद जाखोटिया

बगडी नगर में कलालो के पास स्थित शिव मंदिर में यह कार्यक्रम हुआ, जिसमें स्थानीय धर्मप्रेमी अपने परिवार सहित उपस्थित रहे ।