Wipro’s Explanation: (और उनकी सुनिए…) ‘विप्रो’ में महिला कर्मचारियों के कल्याण, सम्मान एवं गरिमा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है ।

पुणे के कथित ‘कॉर्पोरेट जिहाद’ प्रकरण पर ‘विप्रो’ का स्पष्टीकरण ।

पुणे – सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र से जुडी एक विवादित घटना में, एक पूर्व महिला कर्मचारी ने आरोप लगाया कि इस्लाम धर्म स्वीकार करने से मना करने पर उसे नौकरी से निकाल दिया गया । यह शिकायत हिन्दू जनजागृति समिति द्वारा आयोजित पत्रकार परिषद में सामने लाई गई थी ।

इस संबंध में विप्रो ने स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि, “हमारे संस्थान में महिला कर्मचारियों के कल्याण, सम्मान एवं गरिमा को सर्वोच्च महत्व दिया जाता है । किसी भी प्रकार के अनुचित व्यवहार, भेदभाव, उत्पीडन अथवा किसी व्यक्ति के मूलभूत अधिकारों तथा स्वतंत्रता का उल्लंघन करने वाली गतिविधियों को संस्थान में स्थान नहीं है । इस घटना में हम जांच एजेंसियों को पूरा सहयोग दे रहे हैं तथा सभी आवश्यक प्रमाणपत्र एवं अभिलेख पुलिस को उपलब्ध करा दिए गए हैं । जांच चालू रहने के कारण वर्तमान में इस विषय पर अधिक टिप्पणी नहीं की जा सकती । हम कर्मचारियों को सुरक्षित कार्य वातावरण प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं ।”

विषय या घटना क्या है ?

शिकायतकर्ता महिला का आरोप है कि विप्रो में कार्यरत रहते हुए उस पर इस्लाम धर्म अपनाने तथा एक मुसलमान व्यक्ति के साथ संबंध बनाने के लिए मानसिक दबाव डाला गया । महिला के अनुसार, उसने इसका विरोध करते हुए प्रबंधन से शिकायत की, लेकिन आरोपियों के विरुद्ध कार्यवाही करने के स्थान पर उसे नौकरी से ही हटा दिया गया । उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस घटना में पुलिस द्वारा अभी तक कोई अपराध प्रविष्ट नहीं किया गया है ।

नोट: ये आरोप शिकायतकर्ता पक्ष द्वारा लगाए गए हैं । घटना की जांच तथा तथ्यों की पुष्टि संबंधित जांच एजेंसियों द्वारा की जानी है ।

संपादकीय भूमिका

ऐसा गोलमोल स्पष्टीकरण देने के स्थान पर संस्था/कंपनी को यह बताना चाहिए था कि धर्मांतरण के लिए दबाव डालने वाले कर्मचारियों के विरुद्ध उसने क्या कार्यवाही की है ।