नागपुर में मानसिक तनाव के कारण ‘नीट’ परीक्षार्थी छात्रा ने की आत्महत्या

नागपुर, ४ जून (संवाददाता) – मूलतः मध्यप्रदेश की रहनेवाली, परंतु वर्तमान समय में नागपुर में ‘नीट’ (चिकित्सकीय प्रवेश परीक्षा) की तैयारी करनेवाली छात्रा कु. आकांक्षा चतुर्वेदी (आयु १८ वर्ष) ने २० मई को फांसी लगाकर आत्महत्या की । ‘नीट’ परीक्षा का पेपर लीक होना तथा परीक्षा में अनियमितता की बढती घटनाएं तथा प्रशासन द्वारा परीक्षा निरस्त किए जाने के कारण उत्पन्न प्रचंड मानसिक तनाव के कारण उसने यह कदम उठाया है, ऐसा सामने आया है ।

पिता ने ऋण लेकर की थी सहायता ।

आकांक्षा के पिता कृष्णकुमार चौबे मध्य प्रदेश में मऊगंज के छोटे किसान है । अपनी बेटी को आधुनिक वैद्य (डॉक्टर) बनाने के लिए उन्होंने ‘किसान क्रेडिट कार्ड’के द्वारा ३ लाख रुपए का ऋण लिया था । केवल इतना ही नहीं, आकांक्षा का नागपुर का कोचिंग क्लास का खर्चा चलाने के लिए उसके पिता स्वयं नागपुर में रसोईए का काम कर रहे थे । आकांक्षा नीट परीक्षा में ६५० से अधिक अंक आने के प्रति आश्वस्त थी, परंतु भ्रष्ट शिक्षाव्यवस्था के कारण उसकी यह आश्वस्तता अल्पकालीन सिद्ध हुई । आकांक्षा के कक्ष में मिली चिट्ठी में उसने लिखा है, ‘माता-पिता, आपकी लडकी मन से पढाई कर एक दिन डॉक्टर बनेगी, इसका आपको विश्वास था, परंतु अब मुझमें पुनः परीक्षा देने की धैर्य नहीं बचा है । मैं आपका सपना पूरा नहीं कर सकी । पहले प्रयास में मुझे अच्छे अंक आने की आश्वस्तता थी, परंतु अब दूसरे प्रयास में मैं अच्छे ढंग से परीक्षा दूंगी, इसके प्रति मैं आश्वस्त नहीं हूं । माता-पिता, आप मुझे क्षमा कीजिए ।’

आकांक्षा के काका जगदीश चतुर्वेदी ने कहा कि आकांक्षा परीक्षा देकर जब घर लौटी, तब उसका आत्मविश्वास चरम पर था, परंतु जब पेपर लीक होने की तथा अनियमितताओं के समाचार आने लगे, तब उसे बडा झटका लगा । तब से उसने खाना-पीना छोड दिया । वह किसी के साथ ठीक से नहीं बोलती थी । वह सदैव तनाव में रहती थी, परंतु इसका अंत इतना भयानक होगा, इसकी हमने कल्पना भी नहीं की थी ।

संपादकीय भूमिका

  • वर्तमान शिक्षापद्धति एवं परीक्षातंत्र संपूर्णरूप से खोखले हो चुके हैं । पेपर लीक करना, भ्रष्टाचार तथा बार-बार बदले जानेवाले निर्णयों के कारण प्रामाणिकता के साथ पढाई करनेवाले छात्रों का भविष्य अंधकारमय हो रहा है । केवल भौतिक शिक्षा के पीछे दौडने के कारण छात्रों में प्रतिकूल प्रसंगों का सामना करने की क्षमता शेष नहीं रही है । सरकार को इसे बदलने की आवश्यकता है ।
  • असफलता अथवा तनाव की स्थिति मे आत्महत्या करने की अपेक्षा स्थिति का धैर्यपूर्वक सामना करने का आत्मबल केवल साधना के कारण ही आता है ।