भैयादूज

पौराणिक कथा के अनुसार इस दिन यमुना ने अपने भाई भगवान यमराज को अपने घर आमंत्रित कर उनको तिलक लगाया तथा अपने हाथों से स्वादिष्ट भोजन कराया ।

भैयादूज के निमित्त बहन को उपहार के रूप में चिरंतन ज्ञानामृत से युक्त सनातन संस्था के ग्रंथ भेंट कर, साथ ही राष्ट्र-धर्म के प्रति गौरव बढानेवाले ‘सनातन प्रभात’ का सदस्य बनाकर अनोखा उपहार दीजिए ! 

‘भाई उसकी रक्षा करे’, इसके लिए वह भाई की आरती उतारती है और तब भाई बहन को उपहार देता है । इस उपलक्ष्य में बहन को विशेष उपहार देने की पद्धति है ।

विजयादशमी

दशहरे के दिन की जानेवाली धार्मिक कृतियां, साथ ही उस विषय में उठाई गई आपत्तियों तथा उनके खंडन को भी आज हम इस लेख से जानेंगे ।

कोजागरी पूर्णिमा

कोजागरी पूर्णिमा की रात को लक्ष्मी तथा इंद्र की पूजा की जाती है । कोजागरी पूर्णिमा की कथा इस प्रकार है कि बीच रात्रि में लक्ष्मी पृथ्वी पर आकर जो जागृत है, उसे धन, अनाज तथा समृद्धि प्रदान करती है ।

नवरात्रि का शास्त्र एवं इतिहास

श्रीरामचंद्रजी के हाथों रावण का वध हो, इस उद्देश्य से नारदमुनि ने श्रीराम को नवरात्रि का व्रत करने के लिए बताया । तत्पश्चात यह व्रत पूर्ण कर श्रीराम ने लंका पर चढाई कर, रावण का वध कर दिया ।

उत्तर भारत में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर सनातन संस्था एवं हिन्दू जनजागृति समिति की ओर से भक्तिभाव बढानेवाले विविध आयोजन !

भगवान श्रीकृष्ण के प्रति भाव बढाने तथा उनके बारे में धर्मशास्त्र का ज्ञान समाज को मिले, इस उद्देश्य से सनातन संस्था की ओर से उत्तर भारत  के विविध राज्यों में कार्यक्रमों का आयोजन किया गया । इस विषय में हमारे पाठकों के लिए संक्षेप में समाचार दे रहे हैं ।

Varaha Jayanti : ६ सितंबर को ‘वराह जयंती’ बड़ी संख्या में मनाएं ! -विधायक नितेश राणे

भाद्रपद शुक्‍ल तृतीया अर्थात ६ सितंबर को वराह जयंती बड़ी प्रत्येक स्थान पर मनाने का आवाहन भाजपा के विधायक नितेश राणे ने समस्‍त हिन्दू बंधुओं से किया है ।

गणेशोत्सव का आरंभ श्री गणेश चतुर्थी को ही क्यों ?

गणेश तृतीया, गणेश पंचमी अथवा गणेश सप्तमी के दिन क्यों नहीं मनाई जाती ? तत्त्ववेत्ता पुरुषों की भावना एवं मान्यता यह है कि मनुष्य में सत्त्व, रज एवं तम ये ३ गुण होते हैं । उन्हें सत्ता दिलानेवाला चैतन्य चौथा है ।

मोदक

‘मोद’ का अर्थ है आनंद तथा ‘क’ का अर्थ है छोटा सा अंश ! मोदक का अर्थ है आनंद का छोटा सा अंश !

प्रथम नमन आपको गणेशजी !

श्री गणपति में शक्ति, बुद्धि एवं संपत्ति, ये तीन सात्त्विक गुण हैं । वे भक्तों पर अनुकंपा करनेवाले हैं । श्री गणपति विद्या, बुद्धि एवं सिद्धि के देवता हैं । वे दुखहरण करनेवाले हैं; इसीलिए प्रत्येक मंगलकार्य के आरंभ में श्री गणेश की पूजा की जाती है । विद्यारंभ में तथा ग्रंथारंभ में भी श्री गणेश का स्तवन करते हैं ।