नवरात्रि का शास्त्र एवं इतिहास
श्रीरामचंद्रजी के हाथों रावण का वध हो, इस उद्देश्य से नारदमुनि ने श्रीराम को नवरात्रि का व्रत करने के लिए बताया । तत्पश्चात यह व्रत पूर्ण कर श्रीराम ने लंका पर चढाई कर, रावण का वध कर दिया ।
श्रीरामचंद्रजी के हाथों रावण का वध हो, इस उद्देश्य से नारदमुनि ने श्रीराम को नवरात्रि का व्रत करने के लिए बताया । तत्पश्चात यह व्रत पूर्ण कर श्रीराम ने लंका पर चढाई कर, रावण का वध कर दिया ।
भगवान श्रीकृष्ण के प्रति भाव बढाने तथा उनके बारे में धर्मशास्त्र का ज्ञान समाज को मिले, इस उद्देश्य से सनातन संस्था की ओर से उत्तर भारत के विविध राज्यों में कार्यक्रमों का आयोजन किया गया । इस विषय में हमारे पाठकों के लिए संक्षेप में समाचार दे रहे हैं ।
भाद्रपद शुक्ल तृतीया अर्थात ६ सितंबर को वराह जयंती बड़ी प्रत्येक स्थान पर मनाने का आवाहन भाजपा के विधायक नितेश राणे ने समस्त हिन्दू बंधुओं से किया है ।
गणेश तृतीया, गणेश पंचमी अथवा गणेश सप्तमी के दिन क्यों नहीं मनाई जाती ? तत्त्ववेत्ता पुरुषों की भावना एवं मान्यता यह है कि मनुष्य में सत्त्व, रज एवं तम ये ३ गुण होते हैं । उन्हें सत्ता दिलानेवाला चैतन्य चौथा है ।
श्री गणपति में शक्ति, बुद्धि एवं संपत्ति, ये तीन सात्त्विक गुण हैं । वे भक्तों पर अनुकंपा करनेवाले हैं । श्री गणपति विद्या, बुद्धि एवं सिद्धि के देवता हैं । वे दुखहरण करनेवाले हैं; इसीलिए प्रत्येक मंगलकार्य के आरंभ में श्री गणेश की पूजा की जाती है । विद्यारंभ में तथा ग्रंथारंभ में भी श्री गणेश का स्तवन करते हैं ।
रक्षाबंधन के दिन बहन भाई के हाथ में राखी का धागा बांधती है । चित्त में यदि शुद्ध एवं अच्छी भावनाएं न हों, तो राखी केवल एक धागा बनकर रह जाती है । यदि अच्छी पवित्र, दृढ एवं सुंदर भावना हो, तो वही कोमल धागा बडा चमत्कार करता है ।
‘५.८.२०२४ से श्रावणमास आरंभ हो रहा है । इस काल में नागपंचमी, श्रावणी पूर्णिमा/राखी पूर्णिमा, श्रीकृष्ण जयंती, गोपाळकाला तथा बैलपूजा; ये त्योहार आते हैं । इस अवधि में अध्यात्मप्रसार की दृष्टि से प्रयास किए जा सकते हैं
नागपंचमी के दिन कुछ न काटें, न तलें, चूल्हे पर तवा न रखें इत्यादि संकेतों का पालन बताया गया है । इस दिन भूमिखनन न करें ।
परमार्थ हेतु पोषक तथा ईश्वर के गुणों को स्वयं में अंतर्भूत करने हेतु नामजप, सत्संग, सत्सेवा, त्याग, प्रीति इत्यादि सभी कृत्य करना, साथ ही गृहस्थी एवं साधना के लिए मारक तत्त्वों का अर्थात षड्रिपुओं का निषेध करना, चातुर्मास के ये दो मुख्य उद्देश्य हैं ।