जालोर (राजस्थान) में चोरी के उद्देश्य से मंदिर के वृद्ध पुजारी की हत्या
चाहे किसी भी दल की सरकार हो, वह पुजारी, साधु, संतों की सुरक्षा करने में सदैव ही असफल होती है । यह स्थिति हिन्दू राष्ट्र की अनिवार्यता स्पष्ट करती है ।
चाहे किसी भी दल की सरकार हो, वह पुजारी, साधु, संतों की सुरक्षा करने में सदैव ही असफल होती है । यह स्थिति हिन्दू राष्ट्र की अनिवार्यता स्पष्ट करती है ।
‘वर्ल्ड हिन्दू फेडरेशन बांग्लादेश’ शाखा की जानकारी यह है कि १३ से १७ अक्टूबर इन ५ दिनों में ३३५ मंदिरों की तोडफोड की गई । हिन्दुओं के १ सहस्र ८०० घर जलाएं गए । बांग्लादेश के कॉमिला, जानपुर, नौखाली, वडगाव बाजार, नवाबगंज, रंगपुर में सबसे अधिक आक्रमण किए गए ।
आंदोलन में विश्व हिन्दू परिषद, बजरंग दल, हिन्दू जनजागृति समिति इत्यादि हिन्दुत्वनिष्ठ संगठनों के कार्यकर्ता, साथ ही स्थानीय हिन्दू विशाल संख्या में सहभागी हुए थे । इनमें महिलाएं भी सम्मिलित थीं ।
हम विज्ञान में इतनी प्रगति कर चुके हैं; परंतु छोटा सा कठिन प्रसंग हमारे जीवन में आने से हम निराश होकर हार मान लेते हैं । लाक्षागृह, चीरहरण, १४ वर्ष का वनवास, अज्ञातवास, इन सभी प्रसंगों से ध्यान में आता है कि जीवन में साधना और ईश्वर के प्रति अखंड विश्वास के बल पर हमारा रक्षण कैसे हो सकता है ।
ऐसी मांग करनी पडती है ? अभी तक की सरकारों द्वारा गोहत्या बंदी कानून और गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित किया जाना आवश्यक था, ऐसा ही हिन्दुओं को लगता है !
मोबाइल पर लाखों रुपए खर्च करने की बजाय लोगोें को गाय की रक्षा के लिए तलवार और अन्य शस्त्र खरीदने चाहिए । यदि लोगों को लाखों रुपए के मोबाइल लेना जमता है, तो वे अपनी गायों की रक्षा के लिए निश्चित ही शस्त्र खरीद कर घर में रख सकते हैं ।
शत्रुराष्ट्र का गुणगान करने वालों को ‘देशद्रोही’ घोषित कर सरकार को उन्हें आजीवन कारावास में डालना चाहिए !
भारतीय मुद्रा पर नेताजी सुभाषचंद्र बोस का छायाचित्र छापने की मांग करने वाली याचिका कोलकाता उच्च न्यायालय में प्रविष्ट की गई है । इस पर सुनवाई करते समय न्यायालय ने केंद्र सरकार को इस विषय में उत्तर देने के लिए नोटिस जारी किया है । इस पर २१ फरवरी २०२२ के दिन अगली सुनवाई होने वाली है ।
कश्मीर में जिहादी आतंकवादियों से उत्पन्न संकट को देखते हुए इतनी असावधानी कैसे की जाती है ? इसके लिए उत्तरदायी लोगों पर कार्यवाही होनी चाहिए !
इस संबंध में, भारत के तथाकथित धर्मनिरपेक्ष कांग्रेस, राष्ट्रवादी कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, आम आदमी दल, समाजवादी दल, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट दल एवं अन्य राजनीतिक दल अपना मुंह क्यों नहीं खोलते ? मुनव्वर फारूकी के लिए एक न्याय तथा तस्लीमा नसरीन के लिए दूसरा न्याय क्यों है ?