विधानमंडल प्रशासन का अंधेर राज
सुरक्षा की दृष्टि से गंभीर बात होते हुए भी प्रशासन की अनदेखी
श्री. प्रीतम नाचणकर, विशेष प्रतिनिधि, सनातन प्रभात, मुंबई

मुंबई – वर्तमान समय में महाराष्ट्र विधान मंडल का वर्षाकालीन अधिवेशन चल रहा है । उसके कारण विधान मंडल परिसर में कडी सुरक्षा व्यवस्था रखी गई है । एक ओर सुरक्षा की दृष्टि से सतर्कता बरती जा रही है, तो दूसरी ओर सुरक्षा विभाग विधान भवन के वाहन तल के (पार्किंग ) परिसर में अनदेखी स्थिति में पडे हुए तथा सडी हुई गाडियों की अनदेखी कर रहा है । वहां अनेक वर्षाें से १५ से अधिक गाडियां एक ही स्थान पर अव्यवस्थित स्थिति में पडी हुई हैं तथा उसके कारण ये गाडियां अक्षरशः सड रही हैं । उनमें चारपहिया, दोपहिया वाहन एवं बग्गी भी सम्मिलित हैं । किसी ने यदि इन गाडियों में विस्फोटक जैसी सामग्री रखकर कोई अनिष्ट घटना कराई, तो वह कितना महंगा पडेगा ? अतः प्रशासन को तत्परता के साथ इन गाडियों का निस्तारन करना आवश्यक है ।

१. विधान भवन के मुख्य प्रवेश द्वार के बाहर वाहन तल क्षेत्र है । अधिवेशनकाल में विधान मंडल के सभापति, मुख्यमंत्री सहित सभी मंत्रियों तथा मुख्य प्रशासनिक अधिकारियों की गाडियां यहां पार्क की जाती हैं तथा जब मान्यवर बाहर आनेवाले होते हैं, उस समय उनकी गाडी को पुनः प्रवेशद्वार पर लाया जाता है ।

२. मंत्री एवं अधिकारी भले ही वाहन तल क्षेत्र में स्वयं नहीं जाते हों, तब भी सुरक्षा की दृष्टि से प्रशासन को सतर्क रहना आवश्यक है । इन गाडियों की स्थिति देखने पर विधान मंडल प्रशासन की अकार्यक्षमता ध्यान में आती है ।

ध्यान दिलाने के उपरांत कार्यवाही की दी गई आश्वस्तता ।
‘सनातन प्रभात’ के प्रतिधिन ने जब विधान मंडल परिसर में पडी हुईं इन गाडियों के विषय में विधान मंडल के संपत्ति व्यवस्थापक प्रदीप टिबे से पूछा, तब उन्होंने ‘ये गाडियां मंत्रालय के विभिन्न विभागों की हैं’, ऐसा बताया । ‘इन गाडियों को यहां से ले जाने के लिए क्या संबंधित विभागों को सूचित किया गया ?’ तथा ‘क्या इस विषय में विधानसभा अध्यक्ष को जानकारी है ?’, यह पूछने पर उन्होंने कहा, ‘‘विधानसभा अध्यक्ष एवं विधान परिषद के सभापति को इसकी जानकारी देकर तथा उनसे अनुमति लेकर मैं मंत्रालय के विभिन्न विभागों को परिपत्रक भेजूंगा । इस परिपत्रक के माध्यम से संबंधित विभागों को एक विशिष्ट अवधि में इन गाडियों को यहां से ले जाने के लिए सूचित किया जाएगा ।’’

वास्तव में देखा जाए, तो विधान भवन जैसे महत्त्वपूर्ण स्थान पर सरकार की ही अनेक गाडियों वर्षाें से सडी हुईं स्थिति में रहना, विधान भवन प्रशासन के द्वारा इन गाडियों के संबंध में संबंधित सरकारी विभागों से सामान्य पत्राचार भी न करना तथा गाडियों की दयनीय स्थिति दिखाई देते हुए भी उस पर निर्णय न लेना, इसके विधानमंडल प्रशासन की अकार्यक्षमता एवं असावधानी दिखाई देती है । अतः इसके आगे तो प्रशासन को आगे की कार्यवाही को इन सडी हुई गाडियों के विषय में उचित निर्णय करना आवश्यक है ।
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