New FCRA Rules : ‘धार्मिक कृति’ के नाम पर धर्मांतरण करने वालों के विदेशी दान पर केंद्र सरकार का प्रहार

विदेशी योगदान नियंत्रण विधि के नियमों में संशोधन किया गया

नई दिल्ली – केंद्र सरकार ने विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (‘एफ.सी.आर.ए.’ अर्थात् ‘फॉरेन कंट्रीब्यूशन रेगुलेशन एक्ट’) के नियमों में बडा परिवर्तन किया है । नए संशोधनों के अनुसार अब धर्मांतरण को श्रद्धा-आधारित कर्मकांडों का भाग नहीं माना जाएगा । सरकार के इस कदम का सीधा प्रभाव उन निजी, धार्मिक एवं धर्मार्थ संस्थाओं पर पडेगा जो विदेशी दान के माध्यम से धर्मांतरण की योजनाएं बनाती हैं ।

१. गृह मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि नए नियमों के अनुसार धार्मिक शिक्षा, पूजा-अर्चना, प्रार्थना सभाएं, आध्यात्मिक कार्यक्रम, धार्मिक ग्रंथों का ज्ञान देना या समुदाय-आधारित धार्मिक सेवाए श्रद्धा-आधारित कर्मकांडों की श्रेणी में आएंगी तथा वे चलती रहेंगी ।

२. इसके अतरिक्त किसी भी व्यक्ति पर धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाना, उसे प्रभावित करना या धर्म परिवर्तन हेतु अभियान चलाना ‘धार्मिक सेवा’ की श्रेणी से बाहर माना जाएगा ।

३. यदि किसी संस्था का विदेशी दान धर्मप्रसार या धर्मांतरण से जुडे कार्यों में उपयोग किया जाता है तो उसके विरुद्ध उक्त कानून के अंतर्गत कार्रवाई की जा सकती है ।

४. ऐसे प्रकरणों में योगदान के उपयोग की जांच, अनुमति से जुडी कार्रवाई या अन्य कानूनी कदम उठाए जा सकते हैं ।