Pune Water pollution : ६०० दशलाख (मिलियन) लीटर मलजल सीधे नदी क्षेत्र में छोडे जाने के कारण पुणे नगर की नदियां प्रदूषण के जाल में !

पुणे – महानगरपालिका प्रतिदिन पवना बांध से ५५० दशलाख, एम.आई.डी.सी. से ३० दशलाख, आंद्रा जल योजना से १०० दशलाख, इस प्रकार कुल ६८० दशलाख लीटर जल का शुद्धीकरण करके नगर को आपूर्ति करती है । कुल १ सहस्र दशलाख लीटर जल नगरवासियों द्वारा उपयोग किया जाता है तथा उससे अनुमानतः उतना ही मलजल (सांडपानी) निर्मित होता है । इस निर्मित कुल मलजल में से महानगरपालिका के ४२३ मैला-मलजल शुद्धीकरण केंद्रों में केवल ४०० दशलाख लीटर जल पर ही प्रक्रिया की जाती है । अवशिष्ट ६०० दशलाख लीटर जल महानगरपालिका द्वारा बिना किसी प्रक्रिया के सीधे नदी क्षेत्र में छोड दिया जाता है । इसके कारण नगर की मुूला, पवना तथा इंद्रायणी नदियां अत्यधिक मात्रा में प्रदूषित हो रही हैं ।

नदी क्षेत्र में जलकुंभी (जलपर्णी) बढने का यह एक मुख्य कारण है । प्रदूषण के कारण नदी क्षेत्र में अत्यंत दुर्गंध आती है, मच्छरों का प्रकोप होता है, तथा कुछ स्थानों पर जल पर श्वेत फेन (सफेद झाग) निर्मित होता है । नदी क्षेत्र की मछलियां मर रही हैं । इस विषय पर नगर की बढती जनसंख्या के लिए ४३५ दशलाख लीटर क्षमता के १२ नए मलजल शुद्धीकरण केंद्र स्थापित करने की योजना होने की बात महानगरपालिका के मुख्य अभियंता संजय कुलकर्णी ने बताई ।

संपादकीय भूमिका

  • ‘श्री गणेश मूर्ति विसर्जन के कारण प्रदूषण होता है’ ऐसा मिथ्या प्रलाप करने वाले पर्यावरणविद इस विषय पर मौन क्यों हैं ?
  • यह है ‘पुणे स्मार्ट सिटी’ प्रशासन का कार्यकलाप ! जनता के स्वास्थ्य से खिलवाड करने वाला प्रशासन किस काम का ?