अयोध्या, काशी और मथुरा के मंदिरों की मुक्ति के लिए लडी गई न्यायालयीन लडाई !

राम मंदिर के संदर्भ में ‘प्लेसेस ऑफ वरशिप एक्ट’ के सेक्शन ४ को छूट दी गई थी । आज की तारीख में आर्टिकल २५४ (२) के अंतर्गत राज्य सरकार को उसमें सुधार कर उसे काशी और मथुरा से जोडा जाए और उसके उपरांत राष्ट्रपति उस पर हस्ताक्षर करेंगे ।

ज्ञानवापी मस्जिद के आंतरिक भाग का सर्वेक्षण एवं चित्रिकरण नहीं होने देंगे ! 

न्यायालय के आदेश को न मानते हुए ‘अंजुमन इंतजामिया’ मस्जिद संगठन की चेतावनी ! 

न्यायपालिका पर लोगों का विश्वास हमेशा बना रहे ! – सरन्यायाधीश

कानून को बनाए रखना तथा कार्यपालिका एवं विधीमंडल द्वारा होनेवाली कृतियों पर नियंत्रण रखना, ऐसे बडे संवैधानिक दायित्व न्यायपालिका को सौंपे गए हैं ।

देश से ५ करोड़ घुसपैठियों को निकालने की मांग करनेवाली एक याचिका सुप्रीम कोर्ट में ५ वर्ष से प्रलंबित

राष्ट्रीय सुरक्षा के ऐसे संवेदनशील मुद्दे पर प्रशासन की चुप्पी अस्वीकार्य है। जब ऐसे मुद्दों को वर्षाें तक प्रलंबित रखा जाता है तब क्या आम जनता के प्रश्नों को कभी समय पर न्याय मिलेगा ? यह प्रश्न खडा होता है ।

देहली के जहांगीरपुरी के अनधिकृत भवनों पर बडी कार्रवाई !

संपादकीय भूमिका

जनता को ऐसा ही लगता है, ‘‘देश के प्रत्येक अनधिकृत भवन पर कार्रवाई होनी चाहिए । इसके लिए प्रशासन, पुलिस और शासनकर्ता सदैव कार्यान्वित होने चाहिए !’’

कर्नाटक उच्च न्यायालय का हिजाब के विरोध में अध्ययनपूर्ण निर्णय !

कर्नाटक उच्च न्यायालय की पूर्णपीठ ने विद्यालयों और महाविद्यालयों में हिजाब बंदी का विरोध करनेवाली धर्मांधों की याचिकाएं खारिज कीं । यह महत्त्वपूर्ण बात है तथा उच्च न्यायालय का यह निर्णय दूरगामी परिणाम करनेवाला है ।

अयोध्या, काशी एवं मथुरा में मंदिरों की मुक्ति के लिए हो रही न्यायालयीन लडाई !

सर्वाेच्च न्यायालय का निर्णय काशी, मथुरा, ‘वक्फ कानून’ एवं ‘प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट’ का केंद्रबिंदु है । सर्वाेच्च न्यायालय ने ११६ एवं ११७ इन सूत्रों में कहा है, ‘ऐतिहासिक दृष्टि से मंदिर होगा और उसे तोडा गया हो, तो वह मंदिर बनाने का संकल्प अभेद्य है ।’

उच्चतम न्यायालय ने केंद्र सरकार से उत्तर मांगा !

पिछले ५० वर्षों से इस विषय में कुछ भी न करने वाली सभी पार्टियों की सरकार के लिए यह लज्जास्पद !

देश के ७७५ में से १०२ जिलों में हिन्दू अल्पसंख्यक !

हिन्दुओं को जिलावार अल्पसंख्यक घोषित कर दिया जाए, तो उन्हें अनेक योजनाओं का लाभ मिल सकता है !