ज्ञानवापी प्रकरण में सर्वाेच्च न्यायालय के अभियोग में पक्षकार बनाने की हिन्दू सेना की मांग !

हिन्दू सेना नामक संगठन द्वारा मांग की गई है कि ‘इस अभियोग में हमें भी पक्षकार बनाएं’ ।

ज्ञानवापी के दूसरे दिन का सर्वेक्षण पूर्ण !

वाराणसी (उत्तर प्रदेश) – यहां ज्ञानवापी मस्जिद के दूसरे दिन का सर्वेक्षण कार्य पूरा हो गया है । बताया जाता है कि दो दिनों में ८० प्रतिशत सर्वेक्षण और चित्रीकरण (वीडियोग्राफी) पूरा हो चुका है । १६ मई को एक से डेढ घंटे और सर्वेक्षण होगा । पूरे सर्वेक्षण और चित्रीकरण का विवरण १७ मई को न्यायालय को सौंपा जाएगा ।

ज्ञानवापी मस्जिद के पहले दिन में ४० प्रतिशत सर्वेक्षण पूर्ण !

ज्ञानवापी मस्जिद का सर्वेक्षण १४ मई को सुबह ८ बजे से दोपहर १२ बजे तक किया गया ।

न्यायालय ने मथुरा के शाही ईदगाह मस्जिद के सर्वेक्षण से संबंधित मांग की याचिका स्वीकार कर ली है !

वाराणसी, यहां के न्यायालय में ज्ञानवापी मस्जिद के सर्वेक्षण के उपरांत मथुरा की श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर शाही ईदगाह मस्जिद का भी सर्वेक्षण एवं चित्रीकरण की मांग से संबंधित याचिका प्रविष्ट की गई थी, जिसे न्यायालय ने स्वीकार कर ली है ।

ज्ञानवापी मस्जिद से हिन्दुओं के धार्मिक चिह्न नष्ट किए जा रहे हैं !

पू. (अधिवक्ता) जैन का यह आरोप अत्यंत गम्भीर है ! ऐसा है तो सरकार को हस्तक्षेप करके सत्य उजागर करना आवश्यक है !

स्वयं के अपराधों की जानकारी छुपाने से एकाध व्यक्ति को नौकरी से निलंबित नहीं किया जा सकता ! – सर्वोच्च न्यायालय

स्वयं के अपराधों की जानकरी छुपाई अथवा गलत जानकरी दी, तो एकाध व्यक्ति को एकाएक नोकरी से निलंबित नहीं किया जा सकता, ऐसा निर्णय सर्वोच्च न्यायालय के खंडपिठ ने दिया ।

अगले सप्ताह महानगरपालिकाओं के चुनाव घोषित करें ! – सर्वोच्च न्यायालय का महाराष्ट्र सरकार को आदेश

राज्य के १८ महानगरपालिका और २५ जिला परिषदों के साथ अनेक नगरपंचायत एवं ग्रामपंचायतों के चुनाव प्रलंबित हैं ।

राज ठाकरे के विरुद्ध शिराला (जिला सांगली) के प्रथमवर्ग न्यायालय द्वारा बंदी बनाने का वारंट !

मनसे के अध्यक्ष राज ठाकरे के विरुद्ध सांगली के शिराला प्रथमवर्ग न्यायालय ने गैर जमानती वारंट जारी किया है । ६ अप्रैल को यह वारंट जारी किया गया था; परंतु उस पर अभी तक पुलिस द्वारा कार्रवाई नहीं की गई है ।

टीकाकरण के लिए दबाव नहीं डाल सकते ! – सर्वोच्च न्यायालय

टीका न लेनेवालों को सार्वजनिक स्थल के लिए प्रतिबंधित करना सरकारों की मनमानी है !

यदि ठोस प्रमाण नहीं हैं, तो संबंधित जगह नमाज पढने के लिए ‘धार्मिक स्थल’ नहीं मानी जा सकती ! – सर्वाेच्च न्यायालय

न्यायालय ने कहा है, ‘‘इस संदर्भ में याचिका कर्ता ठोस प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर सके’’ ।