‘सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी का वाक्य ब्रह्मवाक्य होता है’, इसकी १८ वर्ष उपरांत हुई प्रतीति !
वर्ष २००७ में मुंबई में आयोजित हिन्दू धर्मजागृति सभा में आईं समस्याएं बताने पर सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी द्वारा ‘उतने ही पैर पसारिए, जितनी चादर हो’, ऐसा बताकर आश्वस्त किया जाना