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भिवंडी (जनपद ठाणे) – कुछ भी हो जाए, महाराष्ट्र में औरंगजेब की कब्र का महिमामंडन (प्रशंसा) और उदात्तीकरण (सुंदरीकरण) नहीं होने दूंगा और यदि कोई ऐसा करने का प्रयत्न करेगा तो वह प्रयत्न वहीं समाप्त कर दिया जाएगा, यह वचन देता हूं । यह बयान मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने १७ मार्च को भिवंडी में ‘श्री छत्रपति शिवाजी महाराज के मंदिर (शक्तिपीठ) परिसर’ का लोकार्पण करते समय वहां उपस्थित लोगों के समक्ष दिया । इस अवसर पर वहां पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री कपिल पाटील, विधायक किसान कथोरे समेत अन्य मान्यवर भी उपस्थित थे । इस मंदिर परिसर को तीर्थस्थल की श्रेणी देने का आश्वासन भी मुख्यमंत्री ने दिया ।
मुख्यमंत्री ने कहा…,
१. औरंग्या की कब्र को सुरक्षा देना हमारा दुर्भाग्य है !
औरंग्या की कब्र का होना ठीक है; परंतु भारतीय पुरातत्व विभाग ने उसे ‘संरक्षित स्थल’ घोषित किया है; इसलिए, उसकी सुरक्षा का दायित्व राज्य और केंद्र सरकार का है । (राष्ट्रप्रेमी जनता चाहती है कि सरकार संरक्षित स्थलों का निर्धारण करने से संबंधित नियमों में संशोधन कर आक्रमकारियों के सभी प्रतीकों को समाप्त करने वाला कानून बनाए ! – संपादक) जिस औरंग्या ने हमारे हजारों लोगों को मारा, उसकी कबर का संरक्षण हमें करना पड़ रहा है । यह हमारा दुर्भाग्य है ।
२. छत्रपति शिवराय के दर्शन के बिना किसी भी देवता के दर्शन का फल नहीं मिलेगा !
हम अपने इष्ट देवता के मंदिर में जाकर साधना कर सकते हैं । इसका एकमेव कारण छत्रपति शिवाजी महाराज हैं ! उन्होंने देव, देश और धर्म की लढाई जीती थी । इसीलिए, हम हिन्दू हैं और अपने देवी देवताओं के दर्शन कर सकते हैं । जिस प्रकार हनुमान के दर्शन के बिना प्रभु श्रीराम का दर्शन पूरा नहीं होता, उसी प्रकार छत्रपति शिवराय के दर्शन के बिना हमें किसी भी देवता का दर्शन फलित नहीं होगा । इसलिए, छत्रपति शिवराय के मंदिर का निर्माण करने संबंध में निर्णय लेने के विषय में मैं ‘शिवक्रांति प्रतिष्ठान ट्रस्ट’ का आभार मानता हूं । आपके काम के लिए मैं आपके सामने नतमस्तक हूं । यह केवल मंदिर नहीं, इसे सुंदर तटबंध है, बुर्ज है, दर्शनीय प्रवेश मार्ग, बगीचा के लिए स्थान और शिवराय के जीवन के सब प्रसंग यहां दिखाई पड़ते हैं । यहां छत्रपति शिवराय के साथ-साथ महाराष्ट्र की कुलस्वामिनी मां तुलजाभवानी और राजमाता जिजाऊ भी हैं । इसलिए, यह राष्ट्रमंदिर ही है । यहां से हमें बड़ी प्रेरणा मिलने वाली है ।
३. प्रभु श्रीराम समान छत्रपति शिवराय भी ‘युगपुरुष’ !
इस देश में हम प्रभु श्रीराम को ‘युगपुरुष’ कहते हैं । उन्होंने छोटे-छोटे लोगों को एकजुट कर उनके भीतर के पौरुष को जगाया और उनके भरोसे विश्व के सबसे बड़े अधर्मी को समाप्त किया । इस कारण एक नए युग का निर्माण करने वाले प्रभु श्रीराम हमारे लिए युगपुरुष हैं । उसी प्रकार, छत्रपति शिवराय ने भी पिछड़े अठारह जाति के लोगों को एकजुट कर उनमें पौरुष उत्पन्न किया ।
४. सिंहासन के लिए नहीं, देव, देश और धर्म के लिए लड़ना है !
हमें राजा के लिए अथवा सिंहासन के लिए नहीं लडना है । देव, देश और धर्म के लिए लडना है । इन बातों का उन्होंने बीजारोपण किया ।
५. शिवराय के १२ गढ-दुर्गों को वैश्विक धरोहर की मान्यता दिलाने के लिए प्रयत्न करूंगा !
‘मिलजुल कर रहने वाला एकजुट महाराष्ट्र’ ही छत्रपति शिवराय को अपेक्षित है । जाति-धर्म में बंटा महाराष्ट्र शिवराय को अपेक्षित नहीं है । इसलिए, हमें छत्रपति शिवाजी महाराज के मंदिर में जाते समय यही संकल्प लेना चाहिए । छत्रपति शिवराय के १२ गढ-दुर्गों को वैश्विक धरोहर की मान्यता दिलाने के लिए हम प्रयत्न कर रहे हैं । संगमेश्वर में छत्रपति संभाजी महाराज का स्मारक बनाया जाएगा । आगरा की कोठी को स्मारक के रूप में विकसित करने के लिए हमने उत्तर प्रदेश शासन से विनती की है ।
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