फरीदाबाद (हरियाणा) में बजरंग दल के कार्यकर्ता की धर्मांधों द्वारा हत्या, दूसरा घायल

हरियाणा में भाजपा सरकार होते हुए हिन्दू संगठनों के कार्यकर्ताओं की इस प्रकार हत्या न हो , ऐसी ही हिन्दुओं की अपेक्षा है !

(और इनकी सुनिए…) ‘उदयनिधि को सनातन धर्म पर अपना मत प्रस्तुत करने का अधिकार’ – कमल हासन

यदि इस्लाम के विरुद्ध कोई मत प्रस्तुत करता है, तो उसको सर तन से जुदा (सर धड से अलग करना) करने की धमकी दी जाती है । क्या उनसे कभी कमल हासन ने चर्चा करने का परामर्श दिया ? क्या कभी नुपूर शर्मा के प्रकरण में हासन ने मुंह खोला ? क्या उन्होंने कभी कन्हैयालाल के सर धड से अलग करने के वक्तव्य पर मुंह खोला ?

(और इनकी सुनिए …) ‘मंदिर में कुछ लोगों को शर्ट उतार कर प्रवेश देना, अमानवीय प्रथा है ।‘ देवता के सामने सब समान होते हैं । – कांग्रेस के मुख्यमंत्री सिद्धरामय्या

शास्त्र, प्रथा-परंपरा के विषय में बिलकुल अज्ञानी तथा हिन्दु धर्म पर विश्वास न रखनेवाले ही ऐसे वक्तव्य दे सकते हैं ! ऐसे लोगों की ओर कौन ध्यान देगा ?

वक्फ कानून रद्द करें !

हिन्दुओं की अपेक्षा है कि भाजपा के विधायक इस सूत्र को अपनाएं एवं वक्फ कानून निरस्त करने का प्रयास करें ।

सामूहिक बलात्कार एवं हत्या करने के प्रकरण में ३ धर्मांधों को फांसी का दंड

८ वर्ष पश्चात इसप्रकार के अपराधों में दंड होना, इसे अन्याय ही कहना होगा ! इतने जघन्य अपराध की सुनवाई तत्परता से होनी आवश्यक है !

भारतीय संविधान से ‘धर्मनिरपेक्ष’ शब्द निकालने का समय आ गया है ! – अधिवक्ता जॉयदीप मुखर्जी, महासचिव, अखिल भारतीय कानूनी सहायता संस्था, बंगाल

बांगलादेश से आए घुसपैठियों के कारण असम, मिजोरम एवं पश्चिम बंगाल के राज्यों के ८ सहस्र गांव मुसलमानबहुल हो गए हैं । इन सभी गावों में ९० प्रतिशत से अधिक मुसलमान हैं ।

इस्लामिक स्टेट के मुखपत्र द्वारा हिन्दुओं से प्रतिशोध लेने की धमकी

जिहादी आतंकवादी एवं धर्मांध मुसलमानों से हिन्दुओं की रक्षा करने के लिए सरकार क्या कदम उठाएगी ?

राजकोट (गुजरात) में धर्मांधों ने श्रीगणेश मूर्ति बनाने वाले परिवार पर किया आक्रमण !

‘भारत में मुसलमान असुरक्षित हैं’, ऐसा कहने वाले कभी ‘भारत में हिन्दू असुरक्षित हैं’, ऐसा नहीं कहेंगे, यह समझें ! 

(और इनकी सुनिए…) ‘जाति के नाम पर सनातन धर्म ने किया देश का विभाजन !’ – तमिलनाडू विधानसभा अध्यक्ष अप्पावू

अंग्रेजों ने वर्ष १७९५ में छुद्रों सहित प्रत्येक को स्वामित्व का अधिकार दिया, तो वर्ष १९४७ तक, अर्थात १५० वर्षों में छुद्रों के पास भूमि क्यों नहीं थी ?

म. गांधी पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने से अतिन दास इस पूर्व संपादक को बंदी बनाया और छोडा गया !

म. गांधी पर की गई टिप्पणी को न स्वीकारने वाली कांग्रेस स्वातंत्र्यवीर सावरकर का प्रत्येक कदम पर अपमान करती है, इस पर ध्यान दें !