Saugata Roy : बंगाल में दादागिरी तथा खंडणीखोरी के कारण तृणमूल कांग्रेस की पराजय !
चुनाव के समय तथा उससे पूर्व बंगाल में अत्यंत निम्न स्तर का दादागिरी का वातावरण था । स्थानीय स्तर के नेता तथा ‘दादा’ (गुंडा प्रवृत्ति के लोग) ने अनुचित वातावरण बनाया ।
चुनाव के समय तथा उससे पूर्व बंगाल में अत्यंत निम्न स्तर का दादागिरी का वातावरण था । स्थानीय स्तर के नेता तथा ‘दादा’ (गुंडा प्रवृत्ति के लोग) ने अनुचित वातावरण बनाया ।
भारत की गुप्तचर संस्था ’रॉ’ के पूर्व एजेंट लकी बिष्ट की भाजपा से मांग !
ममता बनर्जी को निरंतर द्वितीय बार कडी हार का सामना दिलाने वाले भाजपा के नेता सुवेंदु अधिकारी ने विजय के पश्चात ऐसा मत व्यक्त किया ।
देश के पांच राज्यों असम, बंगाल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और केरल में हुए विधानसभा चुनावों के परिणाम ४ मई को घोषित किए गए । इसमें असम और पुडुचेरी में बीजेपी ने सत्ता बरकरार रखी, जबकि बंगाल में पिछले १५ वर्षों से सत्ता में रहीं ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस को हराकर बीजेपी ने पहली बार सत्ता प्राप्त की ।
यदि बंगाल में भाजपा की सरकार स्थापित हुई, तो वे वहां के समस्त बांग्लादेशियों को वापस भेज देंगे । इससे हमारे लिए एक बड़ा शरणार्थी संकट निर्मित होगा ।
मुख्यमंत्री ममता बॅनर्जी के निर्वाचन क्षेत्र में मतदान यन्त्रों में हेरफेर होने का तृणमूल का आरोप !
बंगाल विधानसभा चुनाव के २९ अप्रैल को दूसरे एवं अंतिम चरण की १४२ सीटों पर मतदान संपन्न हुआ । अंतिम आंकडे प्राप्त होने तक राज्य में कुल ८० प्रतिशत से अधिक मतदान होने की सूचना मिली है ।
बंगाल के मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को चुनाव में पराजित करने का आवाहन बंगाल के पुलिस हवलदार रामकृष्ण कयाल ने एक लघु चलचित्र के माध्यम से बंगालवासियों से किया।
‘रामराज्य क्या होता है ? तथा रामराज्य पुनः आने पर क्या हो सकता है ?’ यह संपूर्ण विश्व को ज्ञात है । अतः मुसलमानों के तुष्टिकरण के लिए तृणमूल के नेता इस प्रकार के वक्तव्य देकर और कितना निम्न स्तर तक गिरेंगे?
तृणमूल कांग्रेस की वोटों के लिए लाचारी ! वर्ष २०१२ में इन्हीं ममता बनर्जी ने केवल इमाम के लिए मानधन की घोषणा की थी । अब हिन्दू जागरूक हो रहे हैं, इसलिए ही पुजारियों को भी मानधन देकर उसमें वृद्धि की गई है, यह ध्यान में रखें !