सनातन की ‘योगतज्ञ दादाजी का चरित्र एवं सीख’ ग्रन्थमाला का प्रथम ग्रंथ

ऋषि-मुनियों समान तपस्या, सर्वज्ञता, लीलासामर्थ्य इत्यादि गुण विशेषताओं से युक्त अद्वितीय व्यक्तित्व अर्थात कुछ वर्ष पूर्व इस भूतल को अपने अस्तित्व से पावन करनेवाले योगतज्ञ दादाजी !

घोर आपातकाल आरंभ होने से पूर्व सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी द्वारा संकलित लगभग दो हजार से अधिक ग्रंथ शीघ्र प्रकाशित करने के लिए साधकों की आवश्यकता !

हिन्दू राष्ट्र कई हजार वर्ष टिकेगा; परंतु ग्रंथों का ज्ञान अनंत काल टिकनेवाला है । इसलिए जैसे हिन्दू राष्ट्र शीघ्र आना आवश्यक है, उतनी ही शीघ्रता, अपातकाल और तीसरे विश्वयुद्ध के आरंभ होने से पहले ग्रंथ प्रकाशित करने की है ।

आयुर्वेदानुसार आचरण कर बिना औषधियों के निरोगी रहें !

आयुर्वेदानुसार आचरण कर बिना औषधियों के निरोगी रहें ! बाढ, विश्वयुद्ध आदि आपदाओं में डॉक्टर, औषधि आदि की अनुपलब्धता की स्थिति में तथा सामान्यत: भी उपयुक्त !

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श्री. मिलिंद चवंडके लिखित ‘श्रीकानिफनाथमाहात्म्य’ ग्रंथ को श्रद्धालुओं से मिला अभूतपूर्व प्रतिसाद

प.पू. श्रीकानिफनाथों के ग्रंथ समान शेष आठों नाथों के स्वतंत्र ग्रंथों की निर्मिति कर, उन्हें भी पांच भाषाओं में श्रद्धालुओं के हाथों में देने का संकल्प श्री. मिलिंद चवंडके ने लिया है । नवनाथों के ग्रंथ का स्वतंत्र लेखन प्रथम बार होने से हम सभी इस ऐतिहासिक घटना के साक्षीदार बनेंगे ।

देवताओं की उपासना भक्तिभाव से करें !

शक्ति शब्द का क्या अर्थ है, शक्तिद्वारा धारण किए ३ मुख्य रूप एवं उनकी विशेषताएं कौनसी हैं, श्री लक्ष्मी एवं दुर्गा, पार्वती एवं काली माता आदि की क्या विशेषताएं हैं, ‘गंगा’ एवं ‘नर्मदा’, इन नदियों की आध्यात्मिक विशेषताएं कौनसी हैं आदि प्रश्नों के उत्तर इस ग्रन्थ में दिए हैं ।

सनातन के दिव्य ग्रंथों के लिए अनुवादकों की आवश्यकता !

जिन्हें अध्यात्म के प्रति रुचि है उन्हें ईश्वरप्राप्ति शीघ्र कराने हेतु तथा संपूर्ण विश्व में हिन्दू धर्म का शास्त्रीय परिभाषा में प्रचार करने के उद्देश्य से, सनातन ने मई २०२१ तक ३३८ अनमोल ग्रंथों का प्रकाशन किया है, भविष्य में हजारों ग्रंथ प्रकाशित होंगे ।