मन को स्वस्थ, प्रसन्न एवं समर्थ बनाने हेतु मन के व्यायाम करना अर्थात साधना करना आवश्यक !

‘व्यायाम का अर्थ शारीरिक व्यायाम करना’, ऐसा हम मानते हैं । इसके प्रति अधिकांश लोग जागरूक भी होते हैं । शरीर सुदृढ एवं स्वस्थ रहे, इस हेतु हम शारीरिक व्यायाम करते हैं । व्यायाम नियमित तथा विशिष्ट समय पर ही करना पडता है ।

पर्वकाल का मुख्य उद्देश्य साध्य न होना तथा इसे साध्य करने हेतु आवश्यक प्रयास

हमें इस आगामी कुंभ मेले के समय समझदारी से काम लेना चाहिए । हमें वास्तविक गंगा स्नान के समय होनेवाली भीड से बचने के बारे में सावधानी से सोचना चाहिए । इस बात का ध्यान रखना होगा कि भीड में आवारागर्दी और भगदड न हो ।

सनातन की ‘योगतज्ञ दादाजी का चरित्र एवं सीख’ ग्रन्थमाला का प्रथम ग्रंथ

ऋषि-मुनियों समान तपस्या, सर्वज्ञता, लीलासामर्थ्य इत्यादि गुण विशेषताओं से युक्त अद्वितीय व्यक्तित्व अर्थात कुछ वर्ष पूर्व इस भूतल को अपने अस्तित्व से पावन करनेवाले योगतज्ञ दादाजी !

योगतज्ञ दादाजी वैशंपायनजी द्वारा सनातन संस्था के संस्थापक परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी के अलौकिक कार्य की प्रशंसा !

सनातन प्रभात’ एकमात्र ऐसा दैनिक है, जिसके माध्यम से हिन्दू धर्म एवं हिन्दू धर्मियों की अर्थहीन आलोचना का आप (डॉ. जयंत आठवलेजी) एवं आपके सेवाभावी साधक निर्भयता से मुंहतोड उत्तर देते हैं ।