कलियुग के त्रिकालदर्शी ऋषि ! योगतज्ञ प.पू. दादाजी वैशंपायनजी

ऋषि-मुनियों समान तपस्या, सर्वज्ञता, लीलासामर्थ्य इत्यादि गुण विशेषताओं से युक्त अद्वितीय व्यक्तित्व अर्थात कुछ वर्ष पूर्व इस भूतल को अपने अस्तित्व से पावन करनेवाले योगतज्ञ दादाजी ! उन्होंने कठोर तपस्या से प्राप्त की सिद्धियों द्वारा जीवनभर पीडितों के संकटों का निवारण किया । उनकी साधनायात्रा, उनका लोकोत्तर कार्य, उन्होंने अपने वैकुंठगमन के विषय में दी पूर्वसूचनाएं एवं विशेष अनुभूतियां प्रस्तुत ग्रन्थमें दी हैं ।
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के ओजस्वी विचार
कोटि कोटि प्रणाम !
सनातन धर्म के मूर्तिमान स्वरूप सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी के श्री चरणों में कोटि-कोटि वंदन !
संपादकीय : गुरुभ्यो नमः ।
प.पू. भक्तराज महाराजजी द्वारा अपने शिष्य डॉ. आठवलेजी के प्रति व्यक्त गौरवोद्गार !
इरोड (तमिलनाडु) में ‘महासुदर्शन याग’ एवं ‘आयुष्य होम’ भावपूर्ण वातावरण में संपन्न !