कलियुग के त्रिकालदर्शी ऋषि ! योगतज्ञ प.पू. दादाजी वैशंपायनजी

ऋषि-मुनियों समान तपस्या, सर्वज्ञता, लीलासामर्थ्य इत्यादि गुण विशेषताओं से युक्त अद्वितीय व्यक्तित्व अर्थात कुछ वर्ष पूर्व इस भूतल को अपने अस्तित्व से पावन करनेवाले योगतज्ञ दादाजी ! उन्होंने कठोर तपस्या से प्राप्त की सिद्धियों द्वारा जीवनभर पीडितों के संकटों का निवारण किया । उनकी साधनायात्रा, उनका लोकोत्तर कार्य, उन्होंने अपने वैकुंठगमन के विषय में दी पूर्वसूचनाएं एवं विशेष अनुभूतियां प्रस्तुत ग्रन्थमें दी हैं ।
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के ओजस्वी विचार
मुंबापुरी में सहस्रों के समष्टि संकल्प से राष्ट्ररक्षा हेतु प्राप्त हुआ आध्यात्मिक बल !
Bangladesh Hindus : पिछले ४ महीनों में १०० हत्याएं, २८ बलात्कार एवं ९५ मंदिरों में तोडफोड
संपादकीय : राष्ट्र के लिए त्याग करें !
मथुरा (उत्तर प्रदेश) में रामराज्य की स्थापना हेतु की गई सामूहिक प्रार्थना !
नोएडा (उत्तर प्रदेश) के विद्यालय में ‘लव जिहाद’ विषय पर व्याख्यान