जिज्ञासुओ, अध्यात्म के संदर्भ में केवल बौद्धिक जानकारी प्राप्त करने में समय व्यर्थ न कर प्रत्यक्ष साधना करें !

अध्यात्म के संदर्भ में जिज्ञासा रखनेवाले अनेक लोग उससे संबंधित पुस्तकें पढने, प्रवचन सुनने आदि माध्यमों से केवल बौद्धिक स्तर की जानकारी प्राप्त करने का प्रयत्न करते हैं ।

सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी के ओजस्वी विचार

‘अंधे की बात मानकर उसके पीछे चलनेवाले जिस प्रकार गड्ढे में गिरते हैं, उसी प्रकार बुद्धिवादियों एवं आधुनिकतावादियों का है । वे दिशाहीनता के कारण स्वयं गड्ढे में गिरते हैं और उनके साथ-साथ उनके पीछे चलनेवाले भी गड्ढे में गिरते हैं ।’

सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी के पूजाघर में स्थित सनातन-निर्मित श्री लक्ष्मीदेवी के चित्र से सूक्ष्म चैतन्य एवं आनंद के स्पंदन प्रक्षेपित होना

इस लेख से हम गुरुदेवजी के पूजाघर में स्थित सनातन-निर्मित श्री लक्ष्मीदेवी के चित्र की आध्यात्मिक विशेषताएं समझ लेते हैं ।

भक्तिसत्संग में श्रीसत्‌शक्ति (श्रीमती) बिंदा नीलेश सिंगबाळजी द्वारा किया गया अमूल्य मार्गदर्शन

‘ईश्वर की लीला से विधि का विधान जीव को जन्म-मृत्यु के चक्र में संलिप्त करता है, जबकि उस घोर बंधन से मुक्त होने हेतु साधना सिखाकर उस चक्र से मुक्त करनेवाले केवल गुरु ही होते हैं !’

‘सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी की महिमा तथा आगामी युद्धकालीन स्थिति’ के विषय में सप्तर्षि द्वारा नाडीपट्टिका में किया गया उल्लेख !

अब दिसंबर के महीने में भारत की राजधानी देहली के ‘भारत मंडपम्’ में ‘सनातन राष्ट्र शंखनाद महोत्सव’ होनेवाला है । एक प्रकार से यह शंखनाद हिन्दू राष्ट्र की स्थापना का जयघोष होगा ।

नवरात्रि के उपलक्ष्य में फोंडा (गोवा) में संपन्न हुए विभिन्न होम !

२२ सितंबर अर्थात घटस्थापना के दिन से विभिन्न होम आरंभ किए गए । इसके अंतर्गत ‘बगलामुखी होम’, ‘वाराही होम’, ‘कार्तिकेय होम’ एवं ‘चंडी होम’ किए गए ।

सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी द्वारा साधक को किया गया अमूल्य मार्गदर्शन !

सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजीश्री. विजय लोटलीकरदेह छोडते समय ईश्वर का अथवा परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी द्वारा बताया ‘निर्विचार’ समान कोई भी नामजप मुख में आए, तब भी चलेगा !

परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी की कृपा से साधना कर सभी साधक संतश्रेष्ठ ज्ञानेश्वर महाराजजी एवं जगद्गुरु संत तुकाराम महाराजजी को अपेक्षित दीपावली के आनंद का नित्य अनुभव करते हैं !

‘दीपावली केवल हिन्दुओं का उत्सव नहीं है, अपितु वह सभी उत्सवों का शिरोमणि है । संतों के जीवन में दीपावली का आनंद नित्य होता है । ‘संतों को अपेक्षित दीपावली क्या होती है ?’ यहां इसका विवेचन किया गया है ।

सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के ओजस्वी विचार

कहां लगभग ३५०० वर्ष पूर्व ही निर्मित हुए विविध धर्म (पंथ), और कहां अनादि अनंत सनातन धर्म !

संपत्काल (शांतिकाल) से युद्धकाल की ओर सीमोल्लंघन करें !

‘विजयादशमी सीमोल्लंघन करने का दिन है ! ‘ऑपरेशन सिंदूर’ ने शत्रु सीमा में सीमोल्लंघन कर यह सिद्ध कर दिया है कि ‘भारतीय सेना शत्रु राष्ट्र पर विजय प्राप्त करने में सक्षम है ।’