
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजीश्री. विजय लोटलीकरदेह छोडते समय ईश्वर का अथवा परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी द्वारा बताया ‘निर्विचार’ समान कोई भी नामजप मुख में आए, तब भी चलेगा !

श्री. विजय लोटलीकर : ‘निर्विचार’ नामजप निरंतर जारी रखना है’, ऐसा हम अनेक बार कहते हैं । अनेक बार मेरे मन में यह प्रश्न उठता है, ‘देह छोडते समय मुख में ईश्वर का नाम हो; परंतु आपके द्वारा बताया गया ‘निर्विचार’ गुरुमंत्र है, इसलिए वह ईश्वर का ही नामजप है न ?’
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी : ‘निर्विचार’ ईश्वर का सच्चा रूप है, तो और क्या चाहिए ? ‘निर्विकार’ वह है जिसका कोई आकार ही नहीं है ! आप चिंता न करें । ईश्वर का अथवा ‘निर्विचार’, कोई भी नामजप मुख में आए, तो भी चलेगा ।’
परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी अवतारी पुरुष हैं ! – जगद्गुरु श्री रामानंदाचार्य नरेंद्राचार्यजी
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