सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी के ओजस्वी विचार

‘अध्यात्म के संदर्भ में जिज्ञासा रखनेवाले अनेक लोग उससे संबंधित पुस्तकें पढने, प्रवचन सुनने आदि माध्यमों से केवल बौद्धिक स्तर की जानकारी प्राप्त करने का प्रयत्न करते हैं । इसलिए उनकी जानकारी में वृद्धि होती है; परन्तु उससे साधना नहीं होती। इसलिए जिज्ञासुओं, हमारे अनेक ऋषी-मुनी एवं संतों ने अध्यात्म एवं साधना के संदर्भ में बहुत कुछ लिखकर रखा है। उसका अध्ययन कर अधिकाधिक समय उसके अनुसार साधना करने के लिए देना चाहिए। केवल अध्ययन करने में समय व्यर्थ नहीं करना चाहिए !’
– सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवले
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के ओजस्वी विचार
सनातन धर्म के मूर्तिमान स्वरूप सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी के श्री चरणों में कोटि-कोटि वंदन !
संपादकीय : गुरुभ्यो नमः ।
प.पू. भक्तराज महाराजजी द्वारा अपने शिष्य डॉ. आठवलेजी के प्रति व्यक्त गौरवोद्गार !
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी के आध्यात्मिक स्तर के अनुसार, उनके विभिन्न समय के छायाचित्र से उनके सगुण-निर्गुण स्पंदनों का सद्गुरु डॉ. मुकुल गाडगीळजी द्वारा किया अभ्यास
अधिवक्ता रामदास केसरकर द्वारा प.पू. डॉक्टरजी का द्रष्टापन अनुभव करना !