दीपावली में किए जानेवाले महालक्ष्मी पूजन के उपलक्ष्य में श्रद्धालुओं के लिए यह लेख…

‘सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी (गुरुदेवजी) हिन्दू राष्ट्र की (ईश्वरीय राज्य की) स्थापना का महान कार्य कर रहे हैं । गुरुदेवजी के पूजाघर में सनातन-निर्मित देवताओं के सात्त्विक चित्र रखे गए हैं । गुरुदेवजी प्रतिदिन पूजाघर में स्थित देवताओं से भक्तिपूर्ण प्रार्थना करते हैं । हिन्दू राष्ट्र की स्थापना के महान समष्टि कार्य में सभी देवता गुरुदेवजी की सहायता करते हैं । गुरुदेवजी में विद्यमान भक्ति के कारण देवताओं के चित्रों में आए अच्छे परिवर्तन स्थूल से भी दिखाई देते हैं । देवताओं के चित्र में विद्यमान शक्ति, भाव, चैतन्य, आनंद एवं शांति के स्पंदनों के अनुपात में भी मूल चित्रों की तुलना में परिवर्तन आए हैं । इस लेख से हम गुरुदेवजी के पूजाघर में स्थित सनातन-निर्मित श्री लक्ष्मीदेवी के चित्र की आध्यात्मिक विशेषताएं समझ लेते हैं । पहले यहां दिए श्री लक्ष्मीदेवी के चित्र की ओर देखकर सूक्ष्म प्रयोग करें ।
१. सूक्ष्म-प्रयोग
‘दोनों चित्रों की ओर १-१ मिनट के लिए देखकर आपको क्या प्रतीत होता है ?’, इसका अध्ययन करें ।
| सूक्ष्म ज्ञान के विषय में प्रयोग : कुछ साधक सूक्ष्म जानने की उनकी क्षमता के अध्ययन के रूप में ‘किसी वस्तु के विषय में मन एवं बुद्धि के परे क्या प्रतीत होता है’, इसका परीक्षण करते हैं । इसे ‘सूक्ष्म ज्ञान का प्रयोग’ कहते हैं । |
२. सूक्ष्म प्रयोग का उत्तर
श्री लक्ष्मीदेवी के मूल चित्र की ओर देखकर प्रमुखता से भाव एवं चैतन्य के स्पंदन प्रतीत होते हैं । सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी के पूजाघर में स्थित श्री लक्ष्मीदेवी के चित्र की ओर देखकर प्रमुखतः चैतन्य एवं आनंद के स्पंदन प्रतीत होते हैं ।

३. सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी पे पूजाघर में स्थित श्री लक्ष्मीदेवी के चित्र पर नीली आभा आना
हिन्दू राष्ट्र शीघ्रातिशीघ्र आए; इसके लिए गुरुदेवजी अत्यंत आर्त्तता से देवताओं से प्रार्थना करते हैं । ईश्वर के प्रति गुरुदेवजी में विद्यमान भक्तिभाव के कारण उनके पूजाघर में स्थित श्री लक्ष्मीदेवी के चित्र में अच्छे परिवर्तन हुए हैं । इसीलिए श्री लक्ष्मीदेवी के चित्र पर नीली आभा आ गई है, साथ ही चित्र की पृष्ठभूमि का नीला रंग भी घना हो गया है । पृष्ठभूमि का नीला रंग घना होने के कारण श्री लक्ष्मीदेवी के सिर के पीछे पीले रंग का प्रभामंडल हलका दिखाई दे रहा है । श्री लक्ष्मीदेवी ऐश्वर्य, समृद्धि, संपन्नता आदि प्रदान करनेवाली देवी हैं । श्री लक्ष्मीदेवी ही श्रीविष्णु की शक्ति हैं । गुरुदेवजी के पूजाघर में स्थित श्री लक्ष्मीदेवी के चित्र में हुए परिवर्तन श्री लक्ष्मीदेवी का तत्त्व अधिकाधिक कार्यरत होने का संकेत है ।’
– श्रीमती मधुरा धनंजय कर्वे, महर्षि अध्यात्म विश्वविद्यालय, गोवा. (१२.४.२०२५)
४. सनातन-निर्मित श्री लक्ष्मीदेवी का मूल चित्र तथा सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी के पूजाघर में स्थित श्री लक्ष्मीदेवी के चित्र में स्थित विभिन्न स्पंदनों का अनुपात (प्रतिशत)

इस सारणी के आधार पर सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी के पूजाघर में स्थितश्री लक्ष्मीदेवी के चित्र के संदर्भ में निम्नांकित सूत्र ध्यान में आते हैं –
४ अ. आनंद के स्पंदनों में बडी मात्रा में वृद्धि होना : श्री लक्ष्मीदेवी के मूल चित्र में प्रमुखतः भाव एवं चैतन्य के स्पंदन हैं । सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी के पूजाघर में स्थित श्री लक्ष्मीदेवी के चित्र में परिवर्तन होकर, उसमें आनंद के स्पंदन भारी मात्रा में बढे । उसके कारण उस चित्र की ओर देखकर बहुत अच्छा लगता है ।
४ आ. चित्र का और अधिक सगुण स्तर पर पहुंचना : सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी के पूजाघर में स्थित श्री लक्ष्मीदेवी का चित्र और अधिक सगुण स्तर पर पहुंच गया है । ‘उस चित्र में मूल चित्र की अपेक्षा देवी का प्रत्यक्ष अस्तित्व और अधिक मात्रा में है’, ऐसा प्रतीत होता है । वर्तमान समय में हिन्दू राष्ट्र की स्थापना करने हेतु अर्थात धर्मकार्य हेतु धन की आवश्यकता है । उसके लिए मानो श्री लक्ष्मीदेवी ‘मैं प्रत्यक्ष हूं’, इसकी अनुभूति देकर धन के संदर्भ में आश्वस्त कर रही हैं, ऐसा प्रतीत होता है ।
– (सद्गुरु) डॉ. मुकुल गाडगीळ (रसायनशास्त्र में पीएच.डी., मुंबई विश्वविद्यालय), महर्षि अध्यात्म विश्वविद्यालय, गोवा. (१३.४.२०२५)


सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के ओजस्वी विचार
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