संपत्काल (शांतिकाल) से युद्धकाल की ओर सीमोल्लंघन करें !

विजयादशमी के निमित्त सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी का संदेश !

सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी

‘विजयादशमी सीमोल्लंघन करने का दिन है ! ‘ऑपरेशन सिंदूर’ ने शत्रु सीमा में सीमोल्लंघन कर यह सिद्ध कर दिया है कि ‘भारतीय सेना शत्रु राष्ट्र पर विजय प्राप्त करने में सक्षम है ।’

‘ऑपरेशन सिंदूर’ के समय के लगातार ५-६ दिन भारत को युद्ध जैसी स्थिति अनुभव हुई और यह अनुभव भारत को आगे आनेवाले कुछ वर्षों तक लगातार होता रहेगा । वर्तमान में संपूर्ण विश्व में युद्ध जैसी स्थिति है।

तीसरा विश्वयुद्ध कभी भी आरंभ हो सकता है । अमेरिका के कर-युद्ध के कारण भविष्य की युद्ध जैसी स्थिति में आर्थिक आक्रमण हो सकते हैं, ऐसी स्थिति बन रही है ।

शांतिकाल में सामान्य नागरिक को शारीरिक और मानसिक समस्याओं की झलक बहुत ही अल्प मात्रा में पहुंचती है । किंतु आगे आनेवाले युद्धकाल में नागरिकों को प्राणहानि, चोट, विकलांगता, भावनात्मक आघात (जैसे तनाव, अवसाद आदि), स्थलांतरण, विस्थापन, महंगाई, बेरोजगारी आदि संकटों का प्रत्यक्ष सामना करना पडेगा । युद्धकाल में अलगाववादी और ‘अर्बन नक्सलवादी’ शक्तियां देश में आंतरिक कलह, भ्रम, अफवाहें आदि फैलाकर दंगे जैसी गृहयुद्ध की स्थिति उत्पन्न कर सकती हैं ।

विजयादशमी के दिन सीमोल्लंघन करने की परंपरा है । यह विजयादशमी का उत्सव संक्रमणकाल का है । भारत संपत्काल (शांतिकाल) से युद्धकाल की ओर बढ रहा है । इसलिए संपत्काल से युद्धकाल की ओर जाने के लिए शारीरिक और मानसिक सीमोल्लंघन करें ! संक्षेप में, ‘शांतिकाल में पसीना बहाया जाए, तो युद्धकाल में रक्तपात नहीं होता’, इस नियम को ध्यान में रखते हुए, जब समय स्वयं सीमोल्लंघन कर रहा है, तब उसका सामना करने की शारीरिक और मानसिक तैयारी करें !

– सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवले