
सप्तर्षि जीवनाडी-पट्टिका में किए गए उल्लेख के अनुसार २७.९.२०२५ को जब आश्विन शुक्ल षष्ठी तिथि थी, उस समय सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी की आध्यात्मिक उत्तराधिकारिणियां श्रीसत्शक्ति (श्रीमती) बिंदा नीलेश सिंगबाळजी एवं श्रीचित्शक्ति (श्रीमती) अंजली मुकुल गाडगीळजी ने गुरुदेवजी का औक्षण किया । उसके उपरांत सप्तर्षि जीवनाडी-पट्टिका का वाचन करनेवाले चेन्नई के पू. डॉ. ॐ उलगनाथन्जी ने नाडीवाचन किया, जिसमें महर्षियों ने निम्नांकित उल्लेख किया है –
‘सनातन संस्था के संस्थापक सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी पृथ्वी पर ईश्वर के सगुण रूप हैं । जिस प्रकार तिरुपति के मंदिर के गर्भगृह में स्थित श्रीवेंकटेश्वर पूरे विश्व के भक्तों की सभी कामानाएं पूर्ण करते हैं, उसी प्रकार रामनाथी (गोवा) के सनातन आश्रमरूपी गर्भगृह में रहकर गुरुदेवजी सभी साधकों की कामनाएं पूर्ण कर रहे हैं । वर्ष १९४२ में पृथ्वी पर जन्मे श्रीविष्णु के अंशावतार सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी के पृथ्वी पर होने के समय अब तक निम्नांकित घटनाएं घटित हुईं –

१. वर्ष २०१४ में पवित्र भारतभूमि का सिंहासन परिवर्तित हुआ ।
२. वर्ष २०१९ में विगत ५०० वर्षाें से लंबित श्रीराम जन्मभूमि का विवाद निर्विवाद रूप से सुलझ गया ।
३. वर्ष २०२३ में अयोध्या में श्रीराम मंदिर के निर्माण का कार्य निर्विघ्न रूप से संपन्न हुआ ।
४. वर्ष २०२४ में विश्व स्तर पर भारत का महत्त्व बढा तथा भारत ‘विश्वगुरु’ बनने के मार्ग पर अग्रसर हुआ ।
गुरुदेवजी के अवतारी जीवन तथा विश्व के इतिहास के सबसे अद्भुत क्षण हैं मई २०२५ में सनातन संस्था की ओर से गोवा में आयोजित किया गया ‘सनातन राष्ट्र शंखनाद महोत्सव’ ! गुरुदेवजी ने उचित समय पर शंखनाद किया । तृतीय विश्वयुद्ध निकट नहीं आया होता, तो गुरुदेवजी शंखनाद करते ही नहीं । अब दिसंबर के महीने में भारत की राजधानी देहली के ‘भारत मंडपम्’ में ‘सनातन राष्ट्र शंखनाद महोत्सव’ होनेवाला है । एक प्रकार से यह शंखनाद हिन्दू राष्ट्र की स्थापना का जयघोष होगा । इस शंखनाद महोत्सव में गुरुदेवजी की ओर से उनकी आध्यात्मिक उत्तराधिकारिणियां श्रीसत्शक्ति (श्रीमती) बिंदा नीलेश सिंगबाळजी एवं श्रीचित्शक्ति (श्रीमती) अंजली मुकुल गाडगीळजी उपस्थित रहेंगी ।
आनेवाले तृतीय विश्वयुद्ध में पृथ्वी का एक तिहाई क्षेत्र नष्ट होनेवाला है तथा मनुष्यजाति का भी एक तिहाई अंश नष्ट होनेवाला है । ‘ऐसे भीषण युद्धकाल में सभी साधकों एवं भक्तों की रक्षा हो’, यह श्रीमन्नारायणस्वरूप सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी के चरणों में हम सप्तर्षि एवं ८८ सहस्र ऋषि-मुनि यही प्रार्थना करते हैं ।’
– सप्तर्षि जीवनाडी (पू. डॉ. ॐ उलगनाथन्जी द्वारा किया गया नाडीवाचन), चेन्नई, तमिलनाडु. (२७.९.२०२५)
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के ओजस्वी विचार
कोटि कोटि प्रणाम !
सनातन धर्म के मूर्तिमान स्वरूप सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी के श्री चरणों में कोटि-कोटि वंदन !
संपादकीय : गुरुभ्यो नमः ।
प.पू. भक्तराज महाराजजी द्वारा अपने शिष्य डॉ. आठवलेजी के प्रति व्यक्त गौरवोद्गार !
इरोड (तमिलनाडु) में ‘महासुदर्शन याग’ एवं ‘आयुष्य होम’ भावपूर्ण वातावरण में संपन्न !