चित्तवृत्तियों का निरोध करना ही योग !
योगासन मात्र शारीरिक व्यायाम नहीं, किंतु आध्यात्मिक व्यायाम हैं । मानसिक स्तर पर कार्य करनेवाले धर्मद्रोहियों का कार्य और उनके नाम कुछ वर्ष उपरांत किसी के ध्यान में नहीं रहते ।
योगासन मात्र शारीरिक व्यायाम नहीं, किंतु आध्यात्मिक व्यायाम हैं । मानसिक स्तर पर कार्य करनेवाले धर्मद्रोहियों का कार्य और उनके नाम कुछ वर्ष उपरांत किसी के ध्यान में नहीं रहते ।
‘अ’ का उच्चारण पेट से, जहां पित्त होता है, ‘उ’ का उच्चारण छाती से, जहां वात रहता है और ‘म’ का उच्चारण गले से होता है, जहां कफ होता है । ‘अ’, ‘उ’ और ‘म’ कहते समय ये तीनों, अर्थात वात, पित्त, कफ के मूल स्थान संतुलित रहने में सहायता होती है ।
योग अर्थात मन और शरीर में सुसंवाद प्रस्थापित करने के लिए किया जानेवाला अभ्यास । योग का उद्देश्य है; मानसिक संतुलन निर्माण करना, शारीरिक स्वास्थ्य सुधारना और आत्म साक्षात्कार करना ।
१५ अगस्त को महर्षि अरविंदजी का जन्मदिवस अर्थात उनकी जयंती ! १९वीं एवं २०वीं शताब्दी में भारतवर्ष में दो महर्षि हुए । उनमें एक थे महर्षि दयानंद सरस्वतीजी तथा दूसरे थे महर्षि अरविंद ! इसीलिए एक लोकोत्तर महर्षि के चरित्रचिंतन के लिए ही इस लेख का यह प्रयोजन है !
मानसिक स्वास्थ्य अच्छा रहने, चिडचिडापन अल्प होने तथा एकाग्रता बढने का दावा !
‘सूर्यनमस्कार इस्लामविरोधी है’, ऐेसा कहते हुए अंतरराष्ट्रीय योग दिन को विरोध करनेवाले लोगों को क्या हिन्दुओं की पवित्र तुलसी स्वीकार है ?
इस्लामी देश योग दिवस मनाते हैं,सूर्यनमस्कार करते हैं, तो भारतीयों (मुस्लिमों ) को हर समय परेशानी क्यों होती है ? धर्मनिरपेक्षतावादी और प्रगतिशील लोग यह क्यों नहीं कहते कि वे स्वयं को और अधिक कटु दिखाने के लिए जानबूझकर इसका विरोध कर रहे हैं ?
हिन्दुओं के देवी-देवताओं के स्तोत्रों की आलोचना करनेवाले बुद्धिप्रामाण्यवादियों को इस विषय में क्या कहना हैं ?
इसमें मकवाना पर धार्मिक भावनाएं आहत करने का आरोप लगाया गया है ।
एक ओर पश्चिमी जगत हिन्दू धर्म की अद्वितीय सीख के कारण नतमस्तक होकर उसे स्वीकारने से अपने जीवन में शांति और आनंद अनुभव होता है, तो दूसरी ओर भारत में हिन्दू उसकी ओर पीठ फेर कर आधुनिकता का ढोंग रचते हैं !