New York Yoga : न्यूयार्क में योग द्वारा नाभिचक्र (मणिपुरचक्र) तथा मूलाधारचक्र जागृत करने का उपक्रम !

मानसिक स्वास्थ्य अच्छा रहने, चिडचिडापन अल्प होने तथा एकाग्रता बढने का दावा !

प्रातिनिधिक चित्र

न्यूयार्क – यहां के ब्रुकलिन में स्थित विलियम्सबर्ग के योग स्टुडियो में योग द्वारा नाभिचक्र (मणिपुरचक्र) तथा मूलाधारचक्र जागृत करने का उपक्रम चलाया गया । इस योग की कार्यशाला में प्रौढों के अतिरिक्त अनेक युवक तथा छोटे बच्चे सम्मिलित हुए थे । यह प्रयास बच्चों में मानसिक शांति उत्पन्न करना, भावनिक संतुलन रखना तथा आत्मनियंत्रण बढाने के लिए था । इस योगा के उपक्रम से मानसिक आरोग्य अच्छा रहने, चिडचिडापन अल्प होने तथा एकाग्रता बढने का दावा किया गया ।

१. अमेरिका में ऐसे मानसिक उपक्रम लोकप्रिय हो रहे हैं । माता-पिता अब बच्चों के अभ्यास अथवा संगीत वर्गों पर ध्यान देने के साथ-साथ उनके भावनिक स्वास्थ्य को भी उतना ही महत्त्व दे रहे हैं ।

२. मिशिगन के मरीना ग्लेकेल ने अपने पुत्र टोनी के लिए ध्यान प्रशिक्षक वेरोनिका की सहायता ली । टोनी मधुमेह से ग्रस्त है । ध्यान के कारण उसे अपने शरीर की जानकारी लेने तथा तनाव अल्प करने में सहायता हुई । योगा के कारण रक्त में शक्कर का स्तर स्थिर रहने लगा । मरीना अब अपने दोनों ही बच्चों के लिए ऑनलाइन सत्र आयोजित करती हैं ।

३. मधुमेह ‍विशारद डॉ. मेरेडिथ विल्क्स कहते हैं, ‘तनाव, चिंता तथा निराशा ये बातें शरीर में स्थित शक्कर के नियंत्रण पर परिणाम करते हैं । योग एवं ध्यान बच्चों का यह तना‍व नष्ट करने हेतु सहायता करते हैं ।

४. सेबेस्टियन अलाप्पट ने कला, योग एवं ध्यान के विषय में ‘द स्पार्क’ नामक कार्यक्रम आरंभ किया है । सेबोस्टियन कहते हैं कि योग एवं दीर्घ श्वसन  सांस छोडने में बच्चों काे लचक तथा आत्मनियंत्रण सिखाते हैं ।

. मानसशास्त्रज्ञ तथा शिक्षक भी अब अभिभावकों को उनके बच्चों काे योग एवं सिखाने का परामर्श दे रहे हैं, जिससे बच्चों को राग एवं तनाव पर नियंत्रण रखना संभव होगा ।

६. बाल मानसशास्त्रज्ञ किम टिंग्ले कहते हैं, ‘आज की पीढी मोबाइल तथा गेजेट्स के साथ बडी हो रही है । इसलिए उनमे एकाग्रता का अभाव स्पष्ट रूप से दिखाई देता है । ऐसी परिस्थिति में ध्यान एवं योग समान क्रियाकल्प भी महत्त्वपूर्ण हैं ।

७. ‘पेडियाट्रिक ऑक्युपेशनल थेरपिस्ट’ रहनेवाले मिशेल किर्नोजेक अलग-अलग स्टुडियो में वर्ग आयोजित करते हैं । इन बच्चों को लंबी सांस लेना सिखानेवाले ‘सॉफ्ट टॉय’ तथा सांस छोडने पर नियंत्रण लाने पर सहायता करनेवाले ‘पिनहील’ समान योगतंत्र सिखाने में सहायता करनेवाले साधन उपलब्ध करा देते हैं । ये साधन बच्चों को मिलेजुले वातावरण में ध्यान तथा शांति की बातें सिखाते हैं । इस उपाय का परिणाम भी दिखाई पडता है । इसके द्वारा अनेक बच्चों का चिढचिढापन अल्प हाे गया है तथा उनके बंधु एवंं मित्र उनसे झगडे करने के स्थान पर उनसे तर्कशुद्धता से बोलने लगे हैं ।