योगासन का हमारे जीवन में अनन्यसाधारण महत्त्व है । योगासन करने से अनेक रोग ठीक होकर स्वास्थ्य में सुधार आता है । योग का अर्थ क्या है ? कौनसी बीमारी पर कौनसे योगासन करने चाहिए ? ओंकारसाधना, प्राणायाम अदि विषयों पर इस विशेषांक में प्रकाश डालने का प्रयत्न किया है ।

योग
योग अर्थात मन और शरीर में सुसंवाद प्रस्थापित करने के लिए किया जानेवाला अभ्यास । योग का उद्देश्य है; मानसिक संतुलन निर्माण करना, शारीरिक स्वास्थ्य सुधारना और आत्म साक्षात्कार करना ।

योग के प्रकार : ज्ञानयोग, हठयोग, कर्मयोग, भक्तियोग, राजयोग, क्रियायोग, मंत्रयोग, लययोग इ.
महर्षि पतंजलि ने योग के ८ अंग बताए हैं – यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि । ये अंग योगसाधना की परिपूर्णता के लिए आवश्यक हैं ।
(संदर्भ : समय-निरामय पंचांग, कलियुग वर्ष ५१२७)
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के ओजस्वी विचार
कोटि कोटि प्रणाम !
सनातन धर्म के मूर्तिमान स्वरूप सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी के श्री चरणों में कोटि-कोटि वंदन !
संपादकीय : गुरुभ्यो नमः ।
प.पू. भक्तराज महाराजजी द्वारा अपने शिष्य डॉ. आठवलेजी के प्रति व्यक्त गौरवोद्गार !
इरोड (तमिलनाडु) में ‘महासुदर्शन याग’ एवं ‘आयुष्य होम’ भावपूर्ण वातावरण में संपन्न !