
चित्तवृत्तियों का निरोध करना अर्थात योग । अन्य शब्दों में, चित्त में विद्यमान संस्कार नष्ट करना, अर्थात योग; ऐसी योग की परिभाषा है । चित्तवृत्तियों का निरोध करने के लिए स्वयं ही साधना करनी पडती है और जनता को भी सिखानी पडती है ।
योगासन मात्र शारीरिक व्यायाम नहीं, किंतु आध्यात्मिक व्यायाम हैं । मानसिक स्तर पर कार्य करनेवाले धर्मद्रोहियों का कार्य और उनके नाम कुछ वर्ष उपरांत किसी के ध्यान में नहीं रहते । इसके विपरीत ऋषियों द्वारा दिए ज्ञान का अनंत काल तक अस्तित्व बना रहता है; क्योंकि उसमें ‘ॐ’ की निर्गुण शक्ति है !
प्रतिदिन साधना करना ही योग !
‘कुछ लोग वर्ष में एक दिन ‘योग (योगासन) दिवस’ मनाने के लिए बताते हैं । इसके विपरीत सनातन के साधक एक दिन नहीं, अपितु ३६५ दिन ‘योग’ अर्थात साधना करते हैं !’
– सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवले
Europe Heatwave : यूरोप में उष्णता की लहर – तापमान ४० अंश सेल्सियस से अधिक ।
Obesity Among Children : यूरोपीय देशों की भांति भारत के बच्चों में बढ रहा है मोटापे का संकट ।
Pune Water pollution : ६०० दशलाख (मिलियन) लीटर मलजल सीधे नदी क्षेत्र में छोडे जाने के कारण पुणे नगर की नदियां प्रदूषण के जाल में !
योग शरीर को ४० वर्ष की आयु में २० वर्ष की आयु से भी अधिक लचीला बनाने में सहायक है ! – PM Narendra Modi
Drug Combinations Ban : केंद्र सरकार द्वारा १६ प्रकार की मिश्रित औषधियों पर प्रतिबंध ।
देवभूमि को कचरे से मत भरो । – Foreign Women Tourist