सामाजिक माध्यमों पर जिहादी आतंकवादी संगठनों के सहस्रों खाते !
क्या सामाजिक माध्यमों के प्रतिष्ठानों को यह दिखाई नहीं देता ? अथवा इन आतंकवादी संगठनों से उनका भी छुपा समर्थन हैं ?
क्या सामाजिक माध्यमों के प्रतिष्ठानों को यह दिखाई नहीं देता ? अथवा इन आतंकवादी संगठनों से उनका भी छुपा समर्थन हैं ?
ऐसे विघातक प्रशिक्षण केंद्र का पता न लगना पुलिस के लिए अत्यंत लज्जास्पद है ! ‘पुलिस को इस बात का पता नहीं लगा या उसने अनदेखा किया ? , इस बिंदु का भी अन्वेषण होना चाहिए एवं वास्तविकता उजागर होनी चाहिए !
जिहादी संगठन के लिए भारत में इस प्रकार धन इकट्ठा किया जाता है । तब सुरक्षातंत्र को इसके विषय में कुछ भी ज्ञात न होना, लज्जाजनक ! आतंकवादी संगठन के लिए पैसे मांगनेवाले और उसके लिए पैसे देनेवाले, ऐसे सभी लोगों पर कठोर कार्रवाई होना आवश्यक !
स्वतंत्रता के ७४ वर्ष बाद भी प्रतिवर्ष हिन्दू तीर्थयात्रियों को आतंकवादी इसलिए लक्ष्य बनाते हैं, क्योंकि वर्तमान शासकों ने आतंकवादियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई नहीं की है ! ये स्थिति अभी तक के सभी शासनकर्ताओं के लिए लज्जाजनक !
जिहादी गतिविधियों में उच्च शिक्षित अधिवक्ताओं की भागीदारी को देखते हुए ´´ मुसलमानों को मुख्यधारा में लाकर ही उनकी, अपराधों में हो रही वृद्धि को कम किया जा सकता है? ऎसा तर्क देने वालों का अब क्या कहना है ?
पहले ही यह उजागर हो चुका है, कि इसी संगठन का एक विद्यार्थी फ्रांस में पत्रिका ‘चार्ली हेब्दो’ के कार्यालय पर हुए आक्रमण में सम्मिलित था। इस दावे पर कौन विश्वास करेगा ? जब यह स्पष्ट हो चुका है कि कन्हैयालाल के दोनों हत्यारे कुछ दिनों के प्रशिक्षण के लिए कराची में इसी संगठन के मुख्यालय में गए थे ?
केंद्र सरकार के अनुरोध के बाद ट्विटर ने भारत में खालिस्तानी आतंकवादियों, पाकिस्तान के आई.एस.आई से जुड़े खातों और आतंकवादी खातों पर प्रतिबंध लगा दिया है।
भारत से इस्लामी देशों में काम के लिए गए नागरिकों को सताया जाता है, यह नया नहीं है । इस विषय में भारत सरकार को कठोर कदम उठाकर उनकी रक्षा करनी चाहिए !
बडगाम (जम्मू-कश्मीर) – सैनिकों ने यहां लश्कर-ए-तैयबा के तीन जिहादी आतंकियों को बंदी बनाया है । उनके नाम आशिक हुसैन हाजम गुलाम, मोही दीन डार और ताहिर बिन अहमद हैं । इनके पास से भारी मात्रा में हथियार जब्त किए गए हैं। इसमें एक चीनी निर्मित पिस्तौल, दो कारतूस, २२भारतीय निर्मित बंदूकें, एक मैगजीन, एक … Read more
पाक-प्रेमी खालिस्तानवादी अब क्यों नहीं बोलते ? भारत में अराजकता निर्माण करनेवाले सिख क्यों नहीं बोलते हैं ?