स्वयं की रक्षा और स्वतंत्रता, यही भारत की प्रधानता होने का भी प्रतिपादन !

नागपुर – बांग्लादेश के हिन्दुओं को कष्ट न हो, यह देखना एक देश के रूप में सरकार का जैसे दायित्व है, वैसे ही अपना भी है । सरकार अपना काम करेगी ही; लेकिन इसके लिए देश के नागरिकों का समर्थन आवश्यक है । देश में योग्य और शांति का वातावरण निर्माण करना, यह सभी का दायित्व है । इसके लिए समाज को अपने जीवन की छोटी-छोटी समस्याओं पर उपाय ढूंढना चाहिए, ऐसा मत राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प. पू. सरसंघचालक डॉ. मोहन जी भागवत ने किया । राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मुख्यालय में स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प. पू. सरसंघचालक डॉ. मोहन जी भागवत के हाथों ध्वजारोहण किया गया । उस समय वह बोल रहे थे ।
डॉ. भागवत ने आगे कहा,
१. देश के लिए बलिदान करनेवाला समूह और उनके समर्थन में खडा समाज, इनके कारण ही देश को स्वतंत्रता मिली । स्वतंत्रता दिलवानेवाली पीढी तो चली गई; लेकिन आज की पीढी पर स्वतंत्रता की रक्षा करने का दायित्व है ।
२. देश की सीमा पर सैनिक लडते हैं । उनके परिवार की चिंता करना अपना कार्य है, यह समझकर आचरण करना प्रत्येक का कर्तव्य है ।
३. स्वतंत्रता मिले हुए देश के लिए जो मार्ग चुना गया है, उस पर चलना आवश्यक है । इसके लिए संविधान के नियमों का पालन करना आवश्यक है ।
४. पडोसी देश में बडी संख्या में हिंसा चालू है । वहां के हिन्दू बंधुओं को आज भी बिना कारण परेशानियों का सामना करना पड रहा है । इसलिए स्वसुरक्षा और स्वतंत्रता, यही भारत की प्रधानता होने के कारण यह प्रत्येक का दायित्व है ।
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