‘प्राणायाम’, यह संज्ञा ‘प्राण’और ‘आयाम’ इन २ शब्दों से तैयार हुई है । ‘प्राण’, अर्थात हमारी जीवनशक्ति, तो ‘आयाम’ का अर्थ विस्तारित होना । प्राणायाम का अर्थ दीर्घश्वसन नहीं अथवा श्वसन का व्यायाम भी नहीं । प्राणायाम से हमें भरपूर प्राणवायु मिलती नहीं, किंतु शरीर (अन्नमय कोश) और मन (मनोमय कोश) में चैतन्य का प्रसार होता है । प्राणायाम का उद्देश्य अधिक प्राणवायु प्राप्त करना नहीं, किंतु मन का नियंत्रण करना है ।
प्राणायाम, श्वास का (श्वसन) योग्य नियंत्रण कर नाडियों की शुद्धि करने की योगशास्त्रांतर्गत एक पद्धति है । इससे शरीर में स्थित जीवनशक्ति वृद्धिंगत होती है । प्राणायाम हठयोग और पातंजल (अष्टांग) योग का एक प्रमुख भाग है । आसनों के दीर्घ अभ्यास के कारण साधक प्राणायाम के लिए सिद्ध होता है ।

नाडीशुद्धि
ऐसी मान्यता है कि योगशास्त्रानुसार शरीर का दायां और बायां भाग क्रमश: सूर्य एवं चंद्र तत्त्वों से सबंधित है। हमारे शरीर में ७२ सहस्र नाडियां हैं । उनमें से सबसे महत्त्वपूर्ण ३ नाडियां हैं – इडा, पिंगला और सुषुम्ना । इन नाडियों में ‘मल’ (अशुद्धि) जमा होने से इन नाडियों में से प्राणशक्ति प्रवाहित नहीं हो सकती । इससे रोग उत्पन्न होते है । यह बाधा दूर करने को नाडीशुद्धि कहते है ।
प्राणायाम के उद्देश्य
- शरीर और मन में स्थिरता : प्राणायाम के उद्देश्यो में एक उद्देश्य है – मन और चित्तवृत्ती पर नियंत्रण पाना । इससे तनाव और चिंता न्यून होकर मानसिक शांति, संतुलन एवं स्थिरता प्रस्थापित होती है ।
- श्वासोच्छ्वास पर नियंत्रण : प्राणायाम श्वास के माध्यम से मन पर नियंत्रण रखने में सहायक है ।
- प्राणऊर्जा (महत्त्वपूर्ण ऊर्जा) बढाना : प्राणायाम प्राणऊर्जा बढाता है, जिससे व्यक्ति अधिक उत्साहपूर्ण और स्वस्थ रहता है ।
- एकाग्रता बढाना : प्राणायाम मन की एकाग्रता बढाने में सहायक है ।
- आत्मजागृति बढाना : प्राणायाम से आत्मजागृति बढने लगती है ।
प्राणायाम की प्रक्रिया
- प्राणायाम करने के लिए पद्मासन, अर्धपद्मासन, सिद्धासन अथवा पालथी लगाकर सीधे बैठे ।
- श्वास लेना-छोडना शांति से, धीर-धीरे और सहजता से करें ।
- पूरक-कुंभक-रेचक का अनुपात १:२:२ होना चाहिए । केवल पूरक-रेचक होगा, तो वह भी १:२ के अनुपात में होना चाहिए ।
- मूलबंध, उड्डीयानबंध और जालंधरबंध ये तीनों बंध कुंभक दीर्घ होने पर ही लगाएं । कुंभक दीर्घ नहीं होगा, तो केवल जालंधर बंध लगाने से भी चलेगा ।
- प्राणायाम करते समय आंखें बंद रखें । इससे बाहर के प्रबल संवेग बंद होते है और भीतर की गतिविधियों पर ध्यान केंद्रित करने में सहायता होती है । (संदर्भ : समय-निरामय पंचांग)
प्राणायाम के लाभ
- प्राणायाम से आकलनशक्ति बढती है ।
- प्राणायाम से कुल मानसिक स्वास्थ्य अच्छा होता है ।
- मन के नकारात्मक और दुष्ट विचारों का प्रभाव न्यून होता है ।
- आचरण में उदात्तता आकर व्यक्तित्त्व प्रभावशाली होता है ।
- मानसिक तनाव के कारण उत्पन्न होनेवाले रोग जैसे कि उच्च रक्तचाप, मधुमेह, निद्रानाश, दमा इत्यादि मनोकायिक रोगों में आराम मिलता है ।
- प्राणायाम से फेफडों की क्षमता और लचीलापन बढता है ।
- प्रतिबंधात्मक उपाय के रूप में रोगप्रतिरोधक शक्ति बढाने में प्राणायाम का उपयोग होता है ।
- हठयोगानुसार उचित प्रकार से प्राणायाम करने पर अनेक रोग नष्ट होते हैं ।
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