
१. सामान्यतया दसवें वर्ष से लडके-लडकियां योगासन प्रारंभ कर सकते हैं ।
२. योगाभ्यास करते समय नामजप करें अथवा देवता, गुरु आदि के प्रति विविध भाव रखें !
३. योगासनों के साथ आहार तथा सोने संबंधी आयुर्वेद के नियमों का पालन करने से योगासनों का पूर्ण लाभ होता है । इसलिए सूर्यास्त के पहले भोजन करना, समय पर सोना, उठना जैसे नियमों का भी पालन करना चाहिए ।
४. योगासन करने के लिए प्रातःकाल अधिक अच्छा होता है । सायंकाल में भी कर सकते हैं । योगासनों के लिए स्थान शांत, स्वच्छ, खुला तथा मन को प्रसन्न करनेवाला चाहिए ।
५. व्यायाम प्रत्येक दिन थोडा-थोडा बढाते जाएं और स्वयं को सहन हो, इतना ही करें ।
६. संभवत: आसन खाली पेट करें अथवा पेयपान करने के उपरांत न्यूनतम आधा घंटा तो बीतने दें । भोजन के उपरांत न्यूनतम चार घंटे होने पर ही योगाभ्यास करें ।
७. व्यायाम के उपरांत २ मिनट तौलिए से अथवा हाथों से पूरा शरीर रगड लें । व्यायाम करने से कोशिकाओं में वृद्धिंगत वात न्यून होता है । साथ ही घर्षण से एक प्रकार का विद्युत प्रवाह निर्माण होकर वह शरीर के रोगों को नष्ट करता है ।
८. आसनों की आदर्श स्थिति साध्य होने तक, विशेषकर लचीलापन उत्पन्न होने तक आसनों के मध्यंतर में थोडा विश्राम करें ।
९. योगासन के उपरांत व्यक्ति को शांति, प्रसन्नता, उत्साह और आनंद प्रतीत होना चाहिए ।
(संदर्भ : विविध जालस्थल)
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