
प्राणायाम करने के लिए प्रयत्नपूर्वक, सुनियंत्रित, दीर्घ; परंतु योग्य मात्रा में श्वास ली जाती है । इसे ‘पूरक’ कहते हैं । यही मापदंड श्वास छोडते समय लगाए जाते हैं, जिसे ‘रेचक’ कहा जाता है । पूरक के अथवा रेचक के उपरांत कुछ क्षण श्वास रोक लिया जाता है । इसे ‘कुंभक’ कहते हैं । सामान्यतया पूरक-कुंभक-रेचक के लिए १:२:२ और १:४:२ ऐसा अनुपात होता है । ‘प्राणायाम के न्यूनतम १० आवर्तन करने चाहिए’, ऐसा संकेत है । प्राणायाम के उपरांत ओंकार जप करने से शीघ्रता से ध्यानस्थ होना संभव होता है ।
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